
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला की ‘को वारंटो’ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। आज गुरुवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच के सामने जब शुक्ला की याचिका पेश हुई, तो कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस ‘को वारंटो’ रिट पर सुनवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जनहित याचिका (PIL) दायर करके मामले में हस्तक्षेप करने की सलाह दी है।
कोर्ट ने कहा- इस विषय पर पहले से चल रही है PIL
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने ‘को वारंटो’ याचिका को खारिज करते हुए यह तर्क दिया कि इस विषय पर पहले से ही एक जनहित याचिका (PIL) हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यह PIL रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता वासु चक्रवर्ती ने दायर की है, जिसमें 14 मंत्री बनाए जाने के संवैधानिक प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई है। इसीलिए कोर्ट ने कांग्रेस नेता शुक्ला को कहा कि वह नई PIL लगाकर ही इस मामले में हस्तक्षेप करें।
PIL ही एकमात्र विकल्प, एडवोकेट को निर्देश
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि यदि वे इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहते हैं, तो उन्हें मौजूदा याचिका की प्रकृति को बदलना होगा। ‘को वारंटो’ पिटीशन पर सुनवाई न करते हुए चीफ जस्टिस ने उन्हें एक जनहित याचिका पेश करने का निर्देश दिया है। यह फैसला साफ करता है कि हाईकोर्ट पहले से विचाराधीन संवैधानिक मामले में दूसरी समानांतर रिट याचिका को स्वीकार नहीं करेगा।
संवैधानिक प्रावधानों पर आपत्ति, मामला विचाराधीन
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में संवैधानिक सीमा से अधिक संख्या में मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति से जुड़ा है। भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत मंत्रियों की संख्या को लेकर एक निश्चित सीमा तय की गई है। चक्रवर्ती द्वारा दायर मूल PIL में इसी सीमा के उल्लंघन पर सवाल उठाए गए हैं, जिसके चलते यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है।



