
Durg News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 150 से ज्यादा लड़कियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन काम करवाया जा रहा था। यह मामला पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के गुडवे फैशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का है। कंपनी पर आरोप है कि वह लड़कियों को सोशल मीडिया के जरिए युवकों को फंसाने और कंपनी तक बुलाने का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं, जिन लड़कियों ने विरोध किया उनके मोबाइल छीन लिए गए और उन्हें परिवार से बात करने तक की अनुमति नहीं दी गई।

नौकरी के नाम पर जाल, फिर बंधक बनाकर सोशल मीडिया पर फंसाने का दबाव
जानकारी के मुताबिक, गुडवे फैशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की यह कंपनी कपड़े और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का मार्केटिंग करने का दावा करती है। कंपनी का ऑफिस बोरसी के कदम प्लाजा में है, जहां अलग-अलग जिलों और राज्यों से आई करीब 150 से 200 लड़कियां रखी गई थीं। सभी को सरकारी नौकरी या मार्केटिंग एजेंट के रूप में बेहतर सैलरी का लालच देकर बुलाया गया था।

कंपनी में आने के बाद लड़कियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए और उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया। पीड़िताओं के मुताबिक, कुछ सीनियर लड़कियां और ट्रेनर उनसे कहती थीं कि अगर पेमेंट चाहिए तो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लड़कों से बात करो, उन्हें भरोसे में लेकर कंपनी बुलाओ। रात 2-3 बजे तक उन्हें ऑनलाइन रहने के लिए मजबूर किया जाता था।

परिवार से संपर्क पर रोक, फोन पर निगरानी
पीड़ित लड़कियों ने बताया कि जब वे अपने परिवार से बात करना चाहती थीं, तो कंपनी के कर्मचारी उनका मोबाइल चेक करते थे। किसी का भी कॉल स्पीकर में लगाया जाता था ताकि वे बाहर किसी को सच्चाई न बता सकें। अगर कोई लड़की बाहर जाने या घर लौटने की बात करती थी, तो उसे धमकाया जाता था कि “हम तुम्हारे घरवालों को बता देंगे कि तुम सोशल मीडिया पर लड़कों से चैट करती हो।”
कई लड़कियों ने बताया कि कंपनी के अंदर भोजन तक समय पर नहीं दिया जाता था। सुबह और रात में थोड़ा-बहुत खाना मिलता था, बाकी दिनभर भूखे रहना पड़ता था। एक लड़की ने तो यहां तक कहा कि उनकी हालत देखकर कुछ साथी लड़कियां आत्महत्या तक करने की सोचने लगी थीं।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
मामला तब सामने आया जब भानुप्रतापपुर की रहने वाली एक लड़की ने किसी तरह अपने परिवार को पूरी बात बताई। परिवार ने इसकी सूचना कांकेर के आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र जैन को दी, जिन्होंने दुर्ग के बजरंग दल प्रांत संयोजक रतन यादव से संपर्क किया। विजयादशमी के दिन लड़की के माता-पिता दुर्ग पहुंचे और कंपनी से बेटी को दशहरा दिखाने के बहाने बाहर निकाला। वहां उन्होंने रतन यादव को पूरी बात बताई।
बजरंग दल की पहल पर 5 पीड़ित लड़कियाँ पहुँचीं थाने
बजरंग दल के कार्यकर्ता रतन यादव, रवि निगम और ज्योति शर्मा ने सामूहिक रूप से बताया कि पाँच पीड़ित लड़कियाँ मदद के लिए उनके पास आई थीं। उन्होंने खुलासा किया कि बोरसी के कदम प्लाजा स्थित गुडवे फैशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के दफ्तर में 100 से 150 लड़के-लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया था। उन्होंने बताया कि इन पीड़ितों में अधिकतर बच्चे वनांचल क्षेत्रों और दूसरे प्रदेशों से आए हुए हैं। कार्यकर्ताओं ने जानकारी दी कि कंपनी की प्रताड़ना से तंग आकर एक लड़की आत्महत्या करने जा रही थी, जिसे अन्य लड़कियों ने रोका। आज वे उस लड़की और उसके साथ चार अन्य लड़कियों को लेकर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने आए हैं।

इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता कंपनी पहुंचे और हंगामा किया। पुलिस को सूचना दी गई और लड़कियों को छुड़ाने की मांग की गई। जांच में कंपनी के खिलाफ कई गंभीर तथ्य सामने आए।

7 लोगों पर FIR, जांच शुरू
पद्मनाभपुर पुलिस ने पीड़िताओं की शिकायत पर 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें रामभरोष साहू, सत्यम पटेल, साहिल कश्यप, सौरभ चौधरी, राहुल सौंधिया, वेदप्रकाश शास्त्री और साधना पटेल शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कंपनी द्वारा युवाओं से 20 हजार से ज्यादा की रकम वसूलने और उन्हें नए लोगों को जोड़ने के लिए मजबूर करने के सबूत मिले हैं।
दुर्ग सीएसपी हर्षित मेहर ने बताया कि मामला गंभीर है और जांच जारी है। जल्द ही कंपनी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
जॉब के नाम पर मांगते थे हजारों रुपए
एक पीड़िता ने बताया कि ट्रेनिंग के नाम पर उनसे 3000 रुपए वसूले गए, जबकि बाद में कहा गया कि नौकरी कन्फर्म करने के लिए 46,000 रुपए देने होंगे। जब परिवार ने वजह पूछी तो कंपनी ने कहा कि “सरकारी जॉब है, इसके लिए लाइसेंस और नॉमिनी फीस लगती है।” कई परिवारों ने बच्चों की नौकरी के सपने में फंसकर कर्ज तक ले लिया।

धमतरी की एक पीड़िता के पिता ने बताया कि उन्होंने 5 प्रतिशत ब्याज पर 47,000 रुपए उधार लेकर बेटी को भेजा था। लेकिन महीनों बीतने के बाद भी न तो सैलरी मिली और न ही कोई असली नौकरी।
कंपनी में नहीं थी कोई नौकरी, बस पैसों की चेन का खेल
पीड़िताओं का कहना है कि कंपनी में न तो कोई ट्रेनिंग थी और न ही किसी उत्पाद की बिक्री होती थी। वहां केवल नए लोगों को फंसाने और उनसे पैसे लेने का खेल चलता था। एक लड़की ने बताया कि वहां उन्हें बार-बार कहा जाता था कि “डिग्री लेकर क्या करोगी, असली कमाई यहां है।” लेकिन हकीकत यह थी कि कंपनी एक तरह की चेन मार्केटिंग स्कीम चला रही थी, जिसमें हर लड़की को अपने जैसी दूसरी लड़कियों को जोड़ना पड़ता था।
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पुलिस और समाजसेवी संगठन जुटे कार्रवाई में
फिलहाल पुलिस ने कंपनी के दफ्तर को सील कर दिया है और पीड़िताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। बजरंग दल और अन्य सामाजिक संगठन भी इस मामले में पीड़ित परिवारों की मदद कर रहे हैं। दुर्ग पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सभी फंसी हुई लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा और जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध होगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



