
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए वकीलों की नई टीम तैयार कर ली गई है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद 36 अधिवक्ताओं की नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। ये सभी वकील बिलासपुर हाईकोर्ट में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के मुकदमों की पैरवी करेंगे। सरकार की ओर से दी गई यह जिम्मेदारी गैर-कर (Non-Tax) मामलों के लिए है, जिसका अर्थ है कि टैक्स से जुड़े विवादों के लिए अलग पैनल काम करेगा।
दो श्रेणियों में बांटे गए वकील: सीनियर और सेंट्रल काउंसिल
प्रशासनिक सुविधा और मुकदमों की गंभीरता को देखते हुए इन नियुक्तियों को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। सीनियर पैनल काउंसिल की लिस्ट में 8 अनुभवी अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं, जो विशेष रूप से जटिल और बड़े कानूनी विवादों को संभालेंगे। वहीं, सेंट्रल गवर्नमेंट काउंसिल की श्रेणी में 28 वकीलों को जगह दी गई है। यह बड़ी टीम केंद्र सरकार के दैनिक कानूनी कार्यों और नियमित मुकदमों में विभाग का प्रतिनिधित्व करेगी।
अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा आदेश
मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इन सभी 36 वकीलों का कार्यकाल 3 साल के लिए तय किया गया है। नियुक्ति की यह अवधि आदेश जारी होने की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि एक निश्चित कार्यकाल मिलने से वकीलों को लंबी अवधि के मुकदमों को समझने और बेहतर तरीके से सरकार का पक्ष रखने में मदद मिलती है। तीन साल बाद इनके प्रदर्शन और जरूरतों की समीक्षा कर कार्यकाल बढ़ाने या नए पैनल पर निर्णय लिया जाएगा।
मुकदमों के बोझ को कम करने में मिलेगी मदद
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार से जुड़े मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार वकीलों की कमी के कारण सुनवाई के दौरान विभागों को अपना जवाब पेश करने में देरी होती थी। अब एक मजबूत पैनल के तैयार होने से न्यायालयीन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। 36 वकीलों की यह टीम सुनिश्चित करेगी कि केंद्र सरकार के हितों की रक्षा समय पर हो सके और अदालती कार्यवाही में किसी तरह की रुकावट न आए।
नई नियुक्तियों से कानूनी कामकाज में आएगी पारदर्शिता
इस नई सूची के आने से छत्तीसगढ़ के कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि नए और अनुभवी चेहरों के शामिल होने से केसों की पैरवी में नयापन और पारदर्शिता आएगी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, जैसे रेल, डाक, रक्षा और गृह मंत्रालय से जुड़े कानूनी मामलों का निपटारा अब अधिक कुशलता से हो सकेगा।







