
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री ने इन तीनों नेताओं के खिलाफ ₹500 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह कानूनी कार्रवाई उन आरोपों के जवाब में की गई है जो हाल ही में कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगाए थे।
सोशल मीडिया पर दी केस की जानकारी
मुख्यमंत्री सरमा ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर इस मुकदमे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि तीनों नेताओं ने जानबूझकर उनके खिलाफ झूठे, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक आरोप लगाए हैं ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री का कहना है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर व्यक्तिगत चरित्र हनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसीलिए उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
12 हजार बीघा जमीन का गंभीर आरोप
पूरे विवाद की जड़ असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई का वह बयान है, जिसमें उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया था। गोगोई ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार ने असम में लगभग 12,000 बीघा (करीब 3,960 एकड़) सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है। इन आरोपों के बाद असम से लेकर छत्तीसगढ़ तक की सियासत में उबाल आ गया और इसे एक बड़े भूमि घोटाले के रूप में पेश किया गया।
आलोचनाओं के बीच नया सियासी मोड़
हिमंत बिस्वा सरमा पहले से ही अपने कुछ बयानों को लेकर सिविल सोसाइटी और पूर्व जजों की आलोचनाओं का सामना कर रहे थे। ऐसे माहौल में जमीन कब्जाने के आरोपों ने उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ा दीं। इसी दबाव के बीच मुख्यमंत्री ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कानूनी रास्ता चुना है। उनका तर्क है कि अगर आरोपों में सच्चाई नहीं है, तो आरोप लगाने वालों को भारी हर्जाना भुगतना होगा।
गौरव गोगोई का पलटवार और चुनौती
मानहानि का केस दर्ज होने के बाद गौरव गोगोई ने पीछे हटने के बजाय मुख्यमंत्री को खुली चुनौती दी है। गोगोई ने X पर लिखा कि मुख्यमंत्री का यह कदम उनकी घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री में हिम्मत है, तो उन्हें कानूनी मुकदमों की शरण लेने के बजाय जनता की अदालत में और कोर्ट में तथ्यों का सामना करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया है कि वे अपने आरोपों पर कायम हैं।
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम इस केस में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि भाजपा इसे झूठ की राजनीति पर करारा प्रहार करार दे रही है। अब सबकी नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि ₹500 करोड़ का यह मानहानि का दावा किस दिशा में जाता है।



