
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की सुविधा देने वाली ‘हमर लैब’ योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने निविदा प्रक्रिया में धांधली कर सरकारी खजाने को करीब 550 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। यह पूरी साजिश आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की लागत बढ़ाकर रची गई थी।
गिरफ्तार हुए आरोपियों के नाम और प्रोफाइल
ईओडब्ल्यू की टीम ने जिन तीन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें पंचकुला की कंपनी ‘रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स’ के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, रायपुर के श्री शारदा इंडस्ट्रीज के संचालक राकेश जैन और लाइजनर प्रिंस जैन शामिल हैं। प्रिंस जैन को इस पूरे खेल के मुख्य किरदारों में से एक शशांक चोपड़ा का रिश्तेदार बताया जा रहा है। इन तीनों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने और मिलीभगत करने के गंभीर आरोप हैं।

फर्जी टेंडर और कार्टेलाइजेशन का मायाजाल
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने ‘पुल टेंडरिंग’ और ‘कार्टेलाइजेशन’ के जरिए पूरी स्पर्धा को ही खत्म कर दिया था। मोक्षित कॉर्पोरेशन नामक फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अन्य कंपनियों ने जानबूझकर फर्जी तरीके से निविदा में हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने आपस में तालमेल बिठाकर इस तरह की सेटिंग की थी कि सरकारी टेंडर हर हाल में उनकी पसंद की कंपनी को ही मिले। इससे दूसरी ईमानदार फर्मों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
एमआरपी से तीन गुना महंगे बेचे उपकरण
भ्रष्टाचार का खेल यहीं नहीं रुका, बल्कि उपकरणों और लैब में इस्तेमाल होने वाले केमिकल (रिएजेंट्स) की कीमतों में भी भारी हेराफेरी की गई। जांच एजेंसी ने पाया कि शॉर्टलिस्ट हुई कंपनियों ने टेंडर के दस्तावेजों में एक जैसा ही विवरण भरा था। मिलीभगत के जरिए मोक्षित कॉर्पोरेशन ने जो सबसे कम रेट कोट किए थे, वे भी असल बाजार कीमत यानी एमआरपी से तीन गुना ज्यादा थे। इस तरह जनता के टैक्स के पैसों की बंदरबांट की गई।
27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर आरोपी
ईओडब्ल्यू ने तीनों आरोपियों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 27 जनवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ब्यूरो अब इन आरोपियों से पूछताछ कर घोटाले की तह तक जाने की कोशिश करेगा। जांच अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और सीजीएमएससी के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस 550 करोड़ के घोटाले में कुछ और बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।



