
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने पर 7 प्रकार की दवाओं को ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। इसके साथ ही, अनियमितताओं के चलते 4 फर्मों को 3-3 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन फैसलों से राज्य की दवा और उपकरण खरीद व्यवस्था में सख्त कार्रवाई का संकेत मिला है।
ब्लैकलिस्टेड हुईं 7 दवाएं और 4 फर्म
सीजीएमएससी ने 2023 में जिन 7 दवाओं को ब्लैकलिस्टेड किया था, उनमें 4 टैबलेट, 2 इंजेक्शन और 1 शैंपू शामिल थे। वहीं, 2025 में की गई कार्रवाई में 4 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है:
- मोक्षित कॉर्पोरेशन और संबद्ध फर्म: रीएजेंट की सप्लाई करने वाली दुर्ग की मोक्षित कॉर्पोरेशन और इससे जुड़ी दो अन्य फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इन पर रीएजेंट व मेडिकल उपकरण घोटाले में संलिप्तता की आशंका है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इनके द्वारा सप्लाई किए गए 28 करोड़ के रीएजेंट खराब हो चुके हैं, और ब्लड जांचने वाली मशीनें लॉक कर दी गई हैं, ताकि रीएजेंट केवल मोक्षित से ही लिया जा सके।
- ऑक्सीजन प्लांट फर्म: डीकेएस अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट आधा-अधूरा बनाने वाली एक फर्म को भी 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है।
- अन्य कार्रवाई: खून पतला करने वाले इंजेक्शन हिपेरिन बनाने वाली वडोदरा की एक फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ-साथ इंजेक्शन को ‘ओके रिपोर्ट’ देने वाली दो लैब के साथ भी रेट कांट्रेक्ट खत्म कर दिया गया है।
हालांकि, तत्कालीन हेल्थ डायरेक्टर और सीजीएमएससी के एमडी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि घोटाले में बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है।
पारदर्शिता के लिए आम जनता के लिए खुला पोर्टल
सीजीएमएससी के कार्यों में पारदर्शिता लाने और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए डीपीडीएमआईएस (ड्रग प्रोक्योरमेंट एंड डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) पोर्टल को अब आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।
- रियल-टाइम जानकारी: इस पोर्टल पर नागरिक प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों (मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी) में दवा, चिकित्सीय उपकरणों की आपूर्ति, वितरण, स्टॉक की स्थिति और निर्माणाधीन अस्पताल भवनों की प्रगति को रियल-टाइम में देख सकते हैं।
- सार्वजनिक दस्तावेज: पोर्टल पर सभी निविदाएं, स्वीकृत आपूर्तिकर्ता और अनुबंध मूल्य सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
- लाइव ट्रैकिंग: दवाओं की डिलीवरी, स्टॉक की वर्तमान स्थिति, और दवा परिवहन में लगे वाहनों की लाइव लोकेशन व उनके रूट की जानकारी भी नागरिक देख सकते हैं, जिससे आपूर्ति में जवाबदेही सुनिश्चित होगी।



