70 हजार मितानिन फिर NGO के भरोसे, बीते साल स्वास्थ्य मंत्री ने इस मॉडल को गलत बताते हुए बंद करने की थी घोषणा

छत्तीसगढ़ में 70 हजार मितानिनों की व्यवस्था एक बार फिर एनजीओ के हवाले कर दी गई है। बीते साल स्वास्थ्य मंत्री ने इस मॉडल को गलत बताते हुए इसे बंद करने की घोषणा की थी और पुराने एनजीओ के साथ अनुबंध खत्म कर राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र को भी भंग कर दिया गया था। कुछ महीनों बाद नया राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र बनाया गया और इसकी जिम्मेदारी एक नए एनजीओ को सौंप दी गई।

SHRC पर कार्रवाई के कारण

नई सरकार के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्टेट हेल्थ रिसोर्स सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि अधिकारी शिकायतों और कमियों को दूर करने में देरी करते हैं और फील्ड में सक्रिय नहीं रहते। मितानिनों के लिए जरूरी संसाधनों की आपूर्ति में भी कमी बताई गई। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद संस्थान को बंद कर दिया गया।

नए NGO को निगरानी की जिम्मेदारी

संगठन बंद होने के कुछ ही समय बाद मितानिनों की निगरानी के लिए नया टेंडर जारी किया गया जिसमें फिर एनजीओ को ही आमंत्रित किया गया। जुलाई में सच नामक संस्था को काम सौंपा गया। संस्था का कहना है कि उन्हें राज्य में सेटअप तैयार करने में समय लग रहा है और सरकार की तरफ से अभी तक बजट भी नहीं मिला है।

नया संस्थान और गोपनीय व्यवस्था

जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग ने नए एनजीओ को काम सौंपने के लिए राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र नाम का संस्थान बनाया है। एनजीओ के अधिकारी इस केंद्र के सदस्य हैं। दूसरी ओर एनएचएम ने मितानिन संसाधन केंद्र तैयार किया है जिसका इस नए संस्थान के साथ अनुबंध है।

मितानिनों की मांगें और विरोध

मितानिनों का कहना है कि उन्हें ठेका व्यवस्था में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि उन्हें सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में शामिल किया जाए ताकि उन्हें स्थायी सुरक्षा और लाभ सुनिश्चित हो सकें। एनजीओ के तहत काम करने के कारण वे निर्धारित कार्यों के अलावा कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाती हैं जिनका भुगतान नहीं मिलता।

दवाओं की कमी और फील्ड समस्याएं

कई इलाकों में मितानिनों की दवा पेटियां खाली पड़ी हैं और समय पर सप्लाई नहीं हो रही। बस्तर जैसी आदिवासी जगहों में यह कमी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही है। मितानिन किट में पैरासिटामोल, ओआरएस, बैंडेज, जिंक टैबलेट जैसी लगभग 19 दवाएं शामिल होती हैं, साथ ही बीपी और शुगर जांच किट भी होती है लेकिन कई जगहों पर यह सामग्री खराब या खत्म पाई गई।

व्यवस्था में सुधार का दावा

राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र के कार्यकारी निदेशक संजीव उपाध्याय का कहना है कि संस्था अभी व्यवस्था बनाने में जुटी है और कुछ समय बाद इसका असर दिखने लगेगा। उन्होंने दावा किया कि मितानिन किट और अन्य समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और फील्ड में समीक्षा की जा रही है।

Also Read: ‘SIR फॉर्म’ के नाम पर साइबर ठगी शुरू, निर्वाचन आयोग ने नागरिकों को किया सचेत

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button