
रायपुर: Bijapur District Hospital: छत्तीसगढ़ में एक साल के भीतर मोतियाबिंद ऑपरेशन में गड़बड़ी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। बीजापुर जिला अस्पताल में मोतियाबिंद सर्जरी के कुछ दिन बाद 9 मरीजों की आँखों की रोशनी कम हो गई है। इनमें 8 मरीजों का ऑपरेशन 24 अक्टूबर को, जबकि एक मरीज का ऑपरेशन 8 नवंबर को हुआ था। आँखों की रोशनी कम होने और शिकायत के बाद, सभी 9 मरीजों को बुधवार को आनन-फानन में रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रभावित होने वालों में 8 महिलाएँ और एक पुरुष शामिल हैं, जिनकी उम्र 52 से 70 साल के बीच है।
मेकाहारा में 5 मरीज ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट
मेकाहारा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि सभी 9 मरीजों की आँखों की जाँच की गई है, जिसमें से एक मरीज की आँख सामान्य पाई गई है, जबकि बाकी मरीजों में समस्या दिखी है। गंभीर स्थिति को देखते हुए पाँच मरीजों को तत्काल ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, शेष तीन मरीजों की आँखों में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। डॉ. सोनकर ने बताया कि मरीजों की आँखों में सूजन है, इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि रोशनी पर कितना प्रभाव पड़ा है। सूजन कम होने में 5 से 6 हफ्ते का समय लग सकता है।
संक्रमण के कारणों की जाँच जारी, गलती किसकी स्पष्ट नहीं
डॉ. संतोष सोनकर ने इस बात की पुष्टि की है कि मरीजों की आँखों में ऑपरेशन के बाद संक्रमण (Infection) फैला है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि संक्रमण फैलने के पीछे गलती डॉक्टर की है या मरीज द्वारा ऑपरेशन के बाद की गई लापरवाही, यह अभी स्पष्ट नहीं है। संक्रमण फैलने के कई कारक हो सकते हैं और सही वजह पीएम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। वहीं, बीजापुर जिला अस्पताल की इंचार्ज डॉ. रत्ना ठाकुर ने बताया कि 24 अक्टूबर को 14 मरीजों का इलाज हुआ था और ऑपरेशन के बाद भेजी गई ओटी रिपोर्ट में संक्रमण निगेटिव आया था।
दंतेवाड़ा और ‘आँखफोड़वा कांड’ की यादें ताज़ा
बीजापुर की इस घटना ने राज्य में पहले हुई मोतियाबिंद ऑपरेशन की गड़बड़ियों की यादें ताज़ा कर दी हैं। इससे ठीक एक साल पहले दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद 10 बुजुर्गों को आँखों में खुजली, दर्द और न दिखने की शिकायत हुई थी, जिसके बाद सर्जरी करने वाली डॉक्टर गीता नेताम समेत तीन स्वास्थ्यकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। इसके अलावा, प्रदेश में 22 सितंबर 2011 को हुए ‘आँखफोड़वा कांड’ में सरकारी लापरवाही के चलते 50 से अधिक लोगों की आँखों की रोशनी चली गई थी, जिसमें दुर्ग के सीएमओ समेत तीन नेत्र सर्जन सस्पेंड हुए थे।
दोबारा फील्ड विजिट के बाद मरीजों को किया गया रेफर
बीजापुर जिला अस्पताल की इंचार्ज डॉ. रत्ना ठाकुर ने बताया कि 24 अक्टूबर को ऑपरेशन के बाद फर्स्ट फील्ड विजिट के दौरान मरीजों को कोई समस्या नहीं थी। हालांकि, ऑपरेशन के दो सप्ताह बाद हुई सेकेंड फील्ड विजिट में यह पाया गया कि कुछ मरीजों की आँखों में रेडनेस (लालिमा) है और कुछ की आँखों से आंसू आ रहे थे। स्थिति को गंभीर मानते हुए सभी मरीजों को तुरंत जिला अस्पताल बुलाया गया और बिना देरी किए 9 मरीजों को मेकाहारा रेफर कर दिया गया, जहाँ उनका इलाज प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है।



