
बिलासपुर:- दोपहर का समय था और आसमान पर हल्के बादल छाए थे। चकरभाठा की सड़कों पर कुछ युवक मस्ती में मोबाइल गेम खेलते घूम रहे थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि एक पल में सबकुछ बदल जाएगा। ज़िंदगी की रफ्तार थमेगी, और एक मासूम खिलाड़ी, जो डिजिटल दुनिया में अपनी जीत ढूंढ रहा था — असल दुनिया में हार जाएगा।
14 साल का आदित्य लखवानी, जो मोबाइल गेम “फ्री फायर” का दीवाना था, उस दिन भी स्क्रीन में डूबा हुआ था। दोस्तों के साथ सड़क पर टहलते हुए वह गेम में इतनी तल्लीनता से डूबा कि उसे यह भी एहसास नहीं हुआ कि उसके कदम उसे मौत की ओर ले जा रहे हैं।
Bilaspur News: चलते-चलते अचानक उसका पैर फिसला। वह सीधे सिर के बल सड़क पर गिरा। एक पल के लिए सबकुछ थम गया। मोबाइल उसके हाथ से छूटकर दूर जा गिरा, लेकिन उसका शरीर वहीं पड़ा रह गया — शांत।
राहुल भयानी, जो उसका बड़ा भाई और उस वक्त उसके साथ था, कांपती आवाज़ में बताता है, “वो गेम में इतना खो गया था कि उसे अपने आसपास की सुध ही नहीं रही। एक सेकंड की चूक… और वो चला गया।”
आनन-फानन में उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने सिम्स रेफर किया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

आदित्य की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं थी। यह उन सैकड़ों बच्चों के लिए एक चेतावनी बन गई, जो वर्चुअल जीत के पीछे भागते-भागते असल ज़िंदगी की कीमत भूल जाते हैं। आदित्य को बचपन से “फ्री फायर” खेलने की आदत थी। जो कभी उसके लिए खेल था, वही धीरे-धीरे एक लत बन गई — और आखिरकार, उसकी ज़िंदगी निगल गई।



