CG Assembly Monsoon Session: सदन में विपक्ष के शोर में भी Ajay Chandrakar ने साधा निशाना, मंत्री OP Choudhary से किए सख्त सवाल

रायपुर: CG Assembly Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र में आज माहौल अचानक गरमा गया जब पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी को हाउसिंग बोर्ड की पुरानी आवासीय योजनाओं पर घेरा। बात सिर्फ सवाल-जवाब की नहीं थी, बल्कि सदन में कुछ देर के लिए विपक्ष का हंगामा और नारेबाज़ी भी हो रही थी। पूर्व मंत्री एवं विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा कि वेबसाइट पर मकानों की संख्या कुछ और बताई गई है, जवाब में कुछ और — यह गड़बड़ी क्यों?

अजय चंद्राकर ने सबसे पहला हमला आंकड़ों पर बोला। उन्होंने कहा – “आपकी वेबसाइट पर 1,00,213 मकानों की बात लिखी है, लेकिन जवाब में कहा जा रहा है 80,870 मकान बने हैं। ये गड़बड़ी है या गोलमाल?”

ओपी चौधरी ने जवाब दिया – “वेबसाइट पर जो संख्या है, उसमें आवासीय के साथ-साथ व्यावसायिक और अन्य संपत्तियां भी जुड़ी हुई हैं। जबकि जवाब में केवल आवासीय मकानों की संख्या दी गई है। फर्क इसलिए है।”

मकानों की बिक्री पर आंकड़े क्या कहते हैं?

वित्त मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि 15 जून 2025 तक छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने:

  • कुल 80,870 मकानों का निर्माण किया है,
  • जिनमें से 78,503 मकान बिक चुके हैं,
  • 2367 मकान अभी भी बिकने बाकी हैं।

Ajay Chandrakar vs OP Choudhary debate: उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेष मकान जर्जर नहीं हैं, इसलिए उनके जीर्णोद्धार की कोई जरूरत नहीं है। इन मकानों को भी ‘जहां है, जैसा है’ की नीति के तहत छूट देकर बेचा जा रहा है।

जब कोई मकान जर्जर नहीं है तो OTS में छूट क्यों?

चंद्राकर ने दूसरा सवाल दागा – “जब आप कह रहे हैं कोई मकान जर्जर नहीं है, तो फिर OTS (वन टाइम सेटलमेंट) में छूट क्यों दी गई? मकान बिक नहीं रहे क्या?”

Housing Board Pre-booking policy: इस पर ओपी चौधरी ने कहा कि पहले बनी कई यूनिट्स में डिमांड नहीं थी, लेकिन अब वन टाइम सेटलमेंट स्कीम (OTS) के जरिए मकान बेचे जा रहे हैं। ये स्कीम इसलिए लाई गई ताकि जो मकान लंबे समय से खाली थे, उन्हें छूट के साथ बेचा जा सके।”

  • OTS-1 में 506 मकान बेचे गए, सरकार को 511 करोड़ रुपये मिले।
  • OTS-2 में 995 मकानों की बिक्री से 147 करोड़ रुपये का राजस्व आया।

स्कीम के तहत:

  • 10 साल से पुराने मकानों पर 30% छूट,
  • 5-10 साल पुराने और 20% से ज़्यादा खाली मकानों पर 30% छूट,
  • 5 साल पुराने और 20% तक खाली मकानों पर 20% छूट,
  • पहली बार शामिल संपत्तियों पर 10% छूट दी गई।

अजय ने कहा: नीति में बदलाव क्यों? क्या पहले बिना मांग के मकान बना दिए?
चंद्राकर ने सरकार की पुरानी नीतियों को भी कटघरे में खड़ा किया। पूछा – “क्या बिना मांग के मकान बनाकर नुकसान नहीं किया गया? अब जाकर समझ में आया?”

इस पर ओपी चौधरी ने कहा – “हां, ये बात सही है। पहले गलतियां हुईं। लेकिन अब हमने साफ नीति बनाई है – कोई भी प्रोजेक्ट तब तक शुरू नहीं होगा जब तक उसमें 60% प्री-बुकिंग न हो। और अगर 3 महीने में 30% बुकिंग हो जाती है, तो टेंडर निकालेंगे। डिमांड के बिना अब एक भी ईंट नहीं लगेगी।”

मकानों की बिक्री नहीं हो रही तो कारण क्या हैं?

अजय चंद्राकर ने पूछा – “जो मकान सालों से नहीं बिके, उनका कारण क्या है? और आपने इस पर क्या विश्लेषण किया?”

चौधरी ने जवाब दिया – “पूरी तरह से विश्लेषण किया गया है। मकानों की बिक्री न होने की वजहें हैं – बहुमंजिला फ्लैटों में कम रुचि, कोरोना काल की मंदी, कुछ खरीदारों का पंजीयन के बाद वापस हटना और कुछ क्षेत्रों में मांग की कमी। इन्हीं कारणों से OTS स्कीम में 10% से 30% तक की छूट दी गई ताकि बचे हुए मकान बेचे जा सकें।”

डिमांड के हिसाब से मकान कैसे तय करते हो? वर्ग विभाजन का आधार क्या है?

अजय चंद्राकर ने आगे पूछा – “EWS, LIG, MIG और HIG के कितने मकान बनेंगे, इसका आधार क्या है? कोई सर्वे है? या मनमर्जी से तय होता है?”

ओपी चौधरी ने साफ किया – “हाउसिंग बोर्ड हर प्रोजेक्ट से पहले डिमांड सर्वे करता है। और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के तहत 15% क्षेत्र EWS के लिए आरक्षित करना जरूरी है। उसी के आधार पर मकानों की कैटेगरी तय की जाती है। लेकिन अब कोई भी मकान बिना डिमांड और बिना 60% बुकिंग के नहीं बनेगा – ये तय है।”

क्या आगे मांग के आधार पर बनेगी योजना?

चंद्राकर ने आखिरी सवाल में नसीहत देते हुए पूछा – “क्या आप यह सुनिश्चित करेंगे कि अब से हर मकान उसी वर्ग का बने जिसकी मांग सबसे ज़्यादा हो? या फिर अब भी जनहित सिर्फ कागज़ों पर रहेगा?”

मंत्री चौधरी ने भरोसा दिलाया – “सरकार ने हाउसिंग बोर्ड को सिर्फ योजनाओं का कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक कॉरपोरेट मॉडल में बदला है। जो डिमांड होगी, उसी के अनुसार मकान बनाए जाएंगे। हम पूरी रणनीति डिमांड आधारित रखेंगे, और उसी के आधार पर टेंडर जारी करेंगे। जनता की ज़रूरत ही हमारी प्राथमिकता है।”

देखिये सदन की कार्यवाही-

नई नीति: बिना 60% बुकिंग नहीं होगा कोई निर्माण

New Housing Policy Chhattisgarh: जब तक किसी प्रोजेक्ट की 60% प्री-बुकिंग नहीं होगी, तब तक उसका टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। और अगर 30% बुकिंग तीन महीने में पूरी हो जाती है, तभी प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाएगा।

बिना प्लानिंग के बने मकान सरकार की सिरदर्दी बन चुके थे। अब नई नीति के तहत सरकार कह मकान बेच सकेगी — जब तक ग्राहक नहीं, तब तक घर नहीं। और यही नीति हाउसिंग बोर्ड को घाटे से बचाकर जमीन पर टिके रहने की नई उम्मीद देगी।

अब देखना ये होगा कि 60% बुकिंग की शर्त पर हाउसिंग बोर्ड कितनी तेजी से जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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