
ED Press Release: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में बड़ा धमाका हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत हुई है। चैतन्य को रायपुर के विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 22 जुलाई तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया गया।
ED Press Release: ईडी ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि चैतन्य बघेल ने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को रियल एस्टेट में खपाया।
कहां से शुरू हुआ मामला?
Chaitanya Baghel Arrest: शराब घोटाले की जांच की नींव ACB/EOW रायपुर द्वारा दर्ज एक FIR से रखी गई थी। इसमें IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। जांच में सामने आया कि 2019 से 2022 के बीच राज्य सरकार को शराब कारोबार के जरिए करीब 2500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और यह राशि अवैध आय (Proceeds of Crime) के रूप में काली कमाई बन गई।
चैतन्य बघेल पर क्या हैं आरोप?
ED Raipur News: ईडी का कहना है कि चैतन्य बघेल ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी। इस रकम का इस्तेमाल उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में किया।
- कई ठेकेदारों को नकद में पेमेंट किया गया
- कुछ पैसे फर्जी बैंक एंट्री के जरिए लगाए गए
- एक योजना के तहत ‘विठ्ठलपुरम’ नाम की हाउसिंग प्रोजेक्ट में फर्जी फ्लैट बुकिंग के बहाने से 5 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ।
इन फ्लैट्स को कागजों में त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया, लेकिन असली लाभार्थी चैतन्य बघेल ही थे।

कांग्रेस तक पहुंचा पैसा?
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चैतन्य बघेल ने इस घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को अनवर ढेबर और अन्य लोगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाया। बताया जा रहा है कि यह रकम बघेल परिवार से जुड़े करीबी लोगों ने बाद में निजी निवेशों में लगाई।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार?
इस शराब घोटाले में अब तक कई बड़े नाम ईडी की गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें शामिल हैं:
- अनिल टुटेजा (पूर्व IAS अधिकारी)
- अरविंद सिंह
- त्रिलोक सिंह ढिल्लन
- अनवर ढेबर
- अरुणपति त्रिपाठी
- कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री और मौजूदा विधायक)
ईडी के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ शराब बिक्री से मुनाफा कमाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे कमाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक खर्चों और निजी संपत्तियों में निवेश के रूप में हुआ।
अभी और बड़े खुलासों की संभावना
ईडी की जांच अभी जारी है। प्रेस रिलीज में साफ कहा गया है कि घोटाले से अर्जित धन की अंतिम उपयोगिता (end use) की जांच चल रही है। आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
छत्तीसगढ़ का ये शराब घोटाला अब महज़ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक राजनीतिक भूकंप बन चुका है। चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी से संकेत साफ हैं कि जांच अब शिखर की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में भूचाल तय माना जा रहा है।
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