Ramgarh Hill Surguja: रामगढ़ पहाड़ी पर संकट: कोयला खदानों की धमक से दरक रहा पहाड़, सियासत भी गरमाई

सरगुजा: Ramgarh Hill Surguja: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी इन दिनों खतरे में है। यहां के स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि इस पौराणिक स्थल को बचाने की मांग कर रहे हैं। वजह है आस-पास चल रही कोयला खदानों की ब्लास्टिंग, जिससे पहाड़ी में दरारें पड़ने और मिट्टी खिसकने की शिकायतें सामने आई हैं। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

वनवास काल से जुड़ा है रामगढ़ का इतिहास

Ramgarh Coal Mining Issue: उदयपुर के पास स्थित रामगढ़ पहाड़ी को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास काल का कुछ समय यहीं बिताया था। पहाड़ी पर स्थित सीताबेंगरा गुफा और लक्ष्मणगढ़ी को इसका साक्ष्य माना जाता है। यही नहीं, यहां बना रामजानकी मंदिर और सालाना मेला इस स्थल की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं।

इतना ही नहीं, इसे संस्कृत के महाकवि कालिदास की कालजयी कृति ‘मेघदूत’ की रचनास्थली भी माना जाता है। ऐसे में यह इलाका सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी है।

कोयला खदानों की धमक से दरक रहा पहाड़

Ramgarh Hill Landslide: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ी के आसपास संचालित कोयला खदानों में हो रही ब्लास्टिंग के कारण रामगढ़ की चट्टानें दरक रही हैं। भू-स्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं और कुछ स्थानों पर मिट्टी के खिसकने से पेड़ भी उखड़ने लगे हैं। पहाड़ी की सतह पर दरारें साफ देखी जा सकती हैं।

Ramgarh Hill Blasting: इन्हीं खतरों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने अब इसे बचाने के लिए समिति बनाकर अभियान शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक स्थल सिर्फ किताबों में ही रह जाएगा।

रामगढ़ को लेकर गरमाई राजनीति

Coal Mining Impact Surguja: राम के नाम पर सियासत का इतिहास पुराना है, और अब जब सवाल उनके नाम से जुड़े स्थल का हो, तो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होना तय है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि नियमों को दरकिनार कर अडानी को खदानों के विस्तार की अनुमति दी जा रही है, जिससे पहाड़ी का अस्तित्व संकट में है। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर रामगढ़ को बचाने की मुहिम भी शुरू कर दी है।

वहीं, पर्यटन मंत्री और स्थानीय विधायक राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ आस्था का केंद्र है और इसे किसी भी हाल में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कोयला खदानों की शुरुआत कांग्रेस सरकार में ही हुई थी, अब वे ही विरोध कर रहे हैं।

क्या बच पाएगा रामगढ़?

रामगढ़ पहाड़ी को लेकर जनभावनाएं जितनी मजबूत हैं, खतरे भी उतने ही बड़े दिख रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में सरकार, प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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