
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज का दिन नक्सल उन्मूलन की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। बस्तर के जगदलपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में 200 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इन सभी ने हाथों में गुलाब और संविधान की प्रति लेकर हिंसा छोड़ शांति और विकास के रास्ते पर लौटने का संकल्प लिया।
दंडकारण्य क्षेत्र से अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण
जगदलपुर पुलिस लाइन में हुए इस समर्पण समारोह में शामिल नक्सली दंडकारण्य क्षेत्र के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों — माड़ डिवीजन और कांकेर की बटालियन नंबर 5 से जुड़े हुए थे। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM), दो दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) सदस्य, 15 डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), एक माड़ एरिया कमेटी सदस्य और 121 अन्य सक्रिय कैडर शामिल हैं।

इन नक्सलियों के साथ करीब 100 से अधिक हथियारों का भी आत्मसमर्पण हुआ, जिनमें राइफल, रिवॉल्वर, वायरलेस सेट और विस्फोटक सामग्री शामिल थी। पुलिस लाइन परिसर में इन हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।
रूपेश के नेतृत्व में माड़ डिवीजन का सफाया
आत्मसमर्पण करने वाले समूह का नेतृत्व नक्सली संगठन के वरिष्ठ प्रवक्ता रूपेश ने किया। यह वही रूपेश है जो लंबे समय से नक्सली संगठन की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाता था।
आज के आत्मसमर्पण के बाद माड़ डिवीजन लगभग पूरी तरह नक्सलमुक्त हो गया है। इसे राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
देखिये सीधा प्रसारण-
रूपेश और उनके साथियों ने भैरमगढ़ से निकलकर जगदलपुर पुलिस लाइन पहुंचकर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के सामने आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे संगठित और बड़ा सरेंडर है, जिसने पूरे दंडकारण्य इलाके में नया संदेश दिया है।
मुख्यमंत्री साय बोले- यह बस्तर में शांति की नई सुबह
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा,
“बस्तर की असली ताकत यहां के लोगों की शिक्षा, आजीविका और आत्मसम्मान में है। हमारी सरकार की जनभागीदारी और विकास आधारित नीति ने दूरस्थ इलाकों तक भरोसे का माहौल तैयार किया है। यह आत्मसमर्पण सिर्फ हथियार डालने का नहीं, बल्कि शांति की ओर निर्णायक कदम है।”
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार का मकसद केवल बंदूकें छुड़वाना नहीं, बल्कि इन लोगों को समाज और अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में वापस लाना है। उन्होंने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।
सरकार की नीति लाई असर, बढ़ा भरोसा
इस आयोजन में बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार की “समर्पण और पुनर्वास नीति” का परिणाम है, जिसने माओवादियों में भरोसा जगाया है।
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और सरकार की ओर से संवाद के लिए खुले मंच ने नक्सलियों को आत्ममंथन का अवसर दिया। इसी का नतीजा है कि अब माओवादी बड़े पैमाने पर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

देश का सबसे बड़ा नक्सल सरेंडर बना उदाहरण
जगदलपुर में हुआ यह आत्मसमर्पण देश के सबसे बड़े नक्सल सरेंडरों में से एक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो भी नक्सली विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहता है, सरकार उसका स्वागत करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ऐसी बनाई गई है जिससे हिंसा छोड़ने वाले युवाओं को रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
बस्तर में शांति और विकास की नई शुरुआत
इस ऐतिहासिक समर्पण के साथ छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद जगी है।
जहां कभी बंदूकों की आवाज गूंजती थी, वहां अब संविधान की शपथ और गुलाब की खुशबू फैली है।
राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में बाकी बचे इलाकों में भी “विकास और विश्वास” की नीति को आगे बढ़ाया जाएगा ताकि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।



