
बिलासपुर के मिनीबस्ती इलाके में स्थित महंत बाड़ा में गुरुवार को बाबा गुरु घासीदास जयंती का उत्साह उस वक्त तनाव में बदल गया जब समारोह के बीच आरएसएस के कुछ पदाधिकारी वहां पहुंच गए। जयंती के पावन अवसर पर सतनामी समाज द्वारा धार्मिक आयोजन किया जा रहा था। आरएसएस नेताओं की मौजूदगी देख वहां मौजूद लोग अचानक उग्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते शांतिपूर्ण माहौल हंगामे में तब्दील हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। हालात बिगड़ते देख मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
समाज का गंभीर आरोप: धार्मिक मंच पर राजनीतिक प्रचार की कोशिश
सतनामी समाज के प्रमुख लोगों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि जयंती जैसे सामाजिक और धार्मिक मंच का इस्तेमाल आरएसएस अपना प्रचार करने के लिए कर रहा था। समाज के युवाओं और बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन उनकी आस्था से जुड़ा है और इसमें किसी बाहरी संगठन का हस्तक्षेप उन्हें मंजूर नहीं है। विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि आरएसएस के लोग अपनी विचारधारा को थोपने की कोशिश कर रहे थे जिसे समाज की मर्यादा के खिलाफ माना गया।
आरएसएस की सफाई: केवल दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे थे महंत बाड़ा
दूसरी तरफ विवादों के केंद्र में आए आरएसएस पदाधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन के सदस्यों का कहना है कि वे किसी तरह का प्रचार करने या विवाद खड़ा करने के उद्देश्य से वहां नहीं गए थे। उनका दावा है कि वे केवल बाबा गुरु घासीदास जी के दर्शन करने और उन्हें नमन करने के लिए महंत बाड़ा पहुंचे थे। आरएसएस की ओर से कहा गया कि उनके आगमन को गलत तरीके से पेश किया गया और बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश की गई है।
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मौके पर तनावपूर्ण स्थिति, पुलिस और वरिष्ठ जनों ने संभाला मोर्चा
जयंती के दिन हुए इस बवाल की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए जिससे स्थिति काफी संवेदनशील हो गई। नारेबाजी और हंगामे को शांत कराने के लिए समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को आगे आना पड़ा। हालांकि काफी देर तक बहसबाजी का दौर चलता रहा लेकिन बड़े बुजुर्गों के दखल के बाद मामले को शांत कराया गया। फिलहाल इलाके में सतर्कता बरती जा रही है ताकि जयंती के शेष कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए और शांति व्यवस्था बनी रहे।



