
रायपुर: छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव 2025 के आयोजनों के बीच शिक्षा विभाग से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्योत्सव की ड्यूटी के लिए 200 से अधिक सरकारी शिक्षकों को अध्यापन कार्य छोड़कर प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाएगा, जिसका सीधा असर 1,426 शासकीय स्कूलों के 5 लाख 27 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षकों को अध्यापन की मूल जिम्मेदारी से हटाकर प्रशासनिक कार्यों और डेटा एंट्री में झोंका जा रहा है।
प्रशासनिक कार्यों में उलझे शिक्षक, शिक्षा की गुणवत्ता पर संकट
राज्योत्सव जैसे बड़े आयोजनों में ड्यूटी देने के अलावा, शिक्षक अन्य कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में भी व्यस्त हैं।
- शिक्षक ‘अपार आईडी’ बनाने और विभिन्न शैक्षणिक अभियानों के प्रशासनिक रिकॉर्ड को पूरा करने में लगे रहते हैं।
- जानकारों का मानना है कि शिक्षकों को अध्यापन कार्य से हटाकर दूसरे कामों में लगाने से छात्र-छात्राओं के सीखने की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। शिक्षक दिनभर डेटा अपलोड करने में उलझे रहते हैं, जिससे बच्चों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।
36 ऐप्स और पोर्टलों पर डेटा अपडेट करने का भारी बोझ
जिले के प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्कूलों तक शिक्षकों पर लगभग 36 ऐप्स और पोर्टलों पर जानकारी अपडेट करने का भारी दबाव है।
- प्रमुख रूप से, उन्हें निष्ठा ऐप, दीक्षा ऐप, उल्लास ऐप, डीजीलॉकर ऐप समेत एजुकेशन पोर्टल, यूडाइस प्लस और विभिन्न छात्रवृत्ति पोर्टलों में उपस्थिति, मूल्यांकन, परीक्षाफल और अन्य रिपोर्ट संबंधी रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट करना होता है।
- यह विशाल डिजिटल बोझ शिक्षकों का अधिकांश समय ले लेता है, जिससे वे कक्षा में छात्रों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।
‘अपार आईडी’ और मूल्यांकन का काम पिछड़ा
शिक्षकों के कई कामों में उलझे रहने के कारण कई महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाएं भी तय समय पर पूरी नहीं हो पाई हैं।
- अपार आईडी: जिले के 5 लाख 27 हजार विद्यार्थियों की डिजिटल पहचान “अपार आईडी” बनाई जानी है, लेकिन अब तक केवल 3 लाख 65 हजार विद्यार्थियों की ही आईडी बन पाई है। यह काम अभी भी अधूरा है।
- उत्कर्ष अभियान: छात्रों के शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे उत्कर्ष अभियान के तहत हर माह होने वाले मूल्यांकन का डेटा भी शिक्षक अपलोडिंग में लगे रहने के कारण पिछड़ रहा है।
शिक्षक संगठनों की मांग: केवल पढ़ाने पर हो ध्यान
जानकारों के अनुसार, शिक्षकों को अध्यापन कार्य से दूसरे कार्यों में लगाने से छात्र-छात्राओं के भविष्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। यही कारण है कि कई शिक्षक संगठन लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि स्कूल के शिक्षकों को केवल अध्यापन कार्य में ही ध्यान केंद्रित करने दिया जाए, ताकि शिक्षा का स्तर सुधारा जा सके और छात्रों का नुकसान रोका जा सके।
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