
खैरागढ़: नगर पालिका परिषद, खैरागढ़ में दुकान नीलामी से जुड़े एक बड़े घोटाले के मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CMO) कोमल ठाकुर और सहायक राजस्व निरीक्षक (RI) राजेश तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर नियमों का उल्लंघन कर, अपात्रों को दुकानें आधी कीमत पर फिर से आबंटित करने का गंभीर आरोप है। इस अनियमितता के चलते शासन को लगभग ₹64.77 लाख का बड़ा राजस्व हानि हुआ है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।
अपात्रों को आधी कीमत पर दुकानों का पुनः आबंटन
घोटाले की जड़ 2022 से 2023 के बीच हुई दुकानों की पहली नीलामी में है। मिली जानकारी के अनुसार, पहली नीलामी में ₹1.48 करोड़ की बोली लगाने वाले कई बोलीदाता पूरी रकम जमा नहीं कर सके। इसके बावजूद, 2025 में जब इसकी पुनः नीलामी हुई, तो उन्हीं बकायेदारों को नियमों के विपरीत फिर से पात्र मान लिया गया और कम कीमत पर दुकानों का आबंटन कर दिया गया। यह निर्णय न केवल नियमों का उल्लंघन था, बल्कि शासन को वित्तीय नुकसान पहुँचाने वाला भी था।
जांच रिपोर्ट में सुनियोजित भ्रष्टाचार का खुलासा
इस मामले में शिकायत मिलने पर विभागीय जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि नियमावली की कंडिका 05 का उल्लंघन किया गया था और आवंटनों की प्रक्रिया को पूरी तरह से गलत बनाया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नीलामी की प्रक्रिया एक पूर्व योजना के तहत ही तय की गई थी, जिसमें तय बोली और बोलीदाता पहले से ही निर्धारित थे। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का खेल था, जिसका उद्देश्य कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाना था।
निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय दुर्ग निर्धारित
घोटाले और शासन को राजस्व क्षति पहुँचाने के गंभीर आरोपों के चलते सीएमओ कोमल सिंह ठाकुर और सहायक राजस्व निरीक्षक राजेश तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इन दोनों अधिकारियों का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग रखा गया है। यह कठोर कदम भ्रष्टाचार और सरकारी नियमों के उल्लंघन के प्रति प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।
नगर पालिका दुकान नीलामी में अनियमितता के मुख्य बिंदु
नगर पालिका परिषद खैरागढ़ दुकान नीलामी में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ₹64.77 लाख का राजस्व हानि।
- CMO कोमल ठाकुर और RI राजेश तिवारी का निलंबन।
- नियमों का उल्लंघन कर दुकानों का आबंटन।
- 2022-23 के बकायेदारों को फिर से पात्र मानना।
- पहली नीलामी में बोली लगाने वाले रकम जमा नहीं कर पाए थे।
- पुनः नीलामी में उन्हीं अपात्रों को आधी कीमत पर दुकान देना।
- नियमावली की कंडिका 05 का उल्लंघन।
- आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह से गलत पाया गया।
- नीलामी की प्रक्रिया का पूर्व निर्धारित होना।
- सुनियोजित भ्रष्टाचार के संकेत।
- निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय दुर्ग निर्धारित।



