
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में जुबानी जंग अब मर्यादा और आस्था के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘रावण भक्त’ करार दिया है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि भूपेश बघेल भले ही दिखावे के लिए हनुमान चालीसा पढ़ते हों, लेकिन असल में उनकी विचारधारा कुंभकरण और रावण जैसी प्रवृत्तियों के साथ खड़ी नजर आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल लगातार सनातन परंपरा और संतों के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं, जो उनकी असली सोच को दर्शाता है। चंद्राकर के मुताबिक, यदि हनुमान चालीसा का प्रभाव उन पर होता, तो उनकी वाणी में संतों के प्रति ऐसी कड़वाहट नहीं होती।
धीरेंद्र शास्त्री का पलटवार: बोले- दक्षिणा मिली तो कैंसर अस्पताल बनवाऊंगा
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी भूपेश बघेल के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें उन्होंने शास्त्री को ‘बीजेपी का एजेंट’ और ‘पैसा बटोरने वाला’ कहा था। धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें आज तक किसी नेता ने कोई दक्षिणा नहीं दी है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे तो चाहते हैं कि नेता उन्हें दक्षिणा दें, क्योंकि वह पैसा वे अपने पास नहीं रखते। उन्होंने जानकारी दी कि बागेश्वर धाम को जो भी दान मिलता है, उसे कैंसर अस्पताल जैसे बड़े सामाजिक कार्यों और जनकल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शास्त्री ने दो टूक कहा कि संतों पर उंगली उठाने से पहले नेताओं को अपनी मंशा साफ करनी चाहिए।
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बढ़ता जा रहा है सियासी पारा: धर्म और राजनीति के बीच फंसा छत्तीसगढ़
दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर सवाल उठाए थे। बघेल ने आरोप लगाया था कि शास्त्री छत्तीसगढ़ में केवल पैसा इकट्ठा करने आते हैं और पर्दे के पीछे से भाजपा के लिए जमीन तैयार करते हैं। इस बयान के बाद से ही भाजपा आक्रामक मुद्रा में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव या बड़े धार्मिक आयोजन नजदीक आते हैं, प्रदेश में धर्म और आस्था से जुड़ी बयानबाजी और तेज हो जाती है। फिलहाल, चंद्राकर और शास्त्री के पलटवार ने इस मुद्दे को पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।



