
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के करीब 49 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों के लिए आने वाला नया साल बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकता है। 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो रहा है, जिसके अब महज 3 दिन ही बचे हैं। चर्चा है कि सरकार 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को हरी झंडी दे सकती है। हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि क्या नए साल की पहली तारीख से उनकी सैलरी स्लिप बदल जाएगी। वेतन आयोग का गठन हर 10 साल में किया जाता है ताकि महंगाई और जीवन स्तर के आधार पर सरकारी अमले की तनख्वाह को तर्कसंगत बनाया जा सके।
क्या है 8वें वेतन आयोग का स्टेटस: संसद में सरकार ने दिया जवाब
8वें वेतन आयोग को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में भी सवाल गूंजे। हाल ही में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि आयोग का गठन पहले ही हो चुका है। वित्त मंत्रालय ने 3 नवंबर 2025 को एक संकल्प के जरिए इसके ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (TOR) यानी कार्यक्षेत्र को अधिसूचित कर दिया है। इसका मतलब है कि आयोग ने अपनी रूपरेखा तैयार कर ली है और अब वह विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। सरकार के इस कदम से उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें आयोग के गठन में देरी की बात कही जा रही थी।
फिटमेंट फैक्टर का गणित: कैसे तय होगी आपकी नई बेसिक सैलरी?
नए वेतनमान में सबसे अहम शब्द ‘फिटमेंट फैक्टर’ होता है। यह वह जादुई आंकड़ा है जिससे पुराने वेतन को गुणा करके नया मूल वेतन तय किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था, लेकिन 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.86 किए जाने की प्रबल संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो नए फिटमेंट फैक्टर के साथ यह बढ़कर कई गुना हो जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए की जाती है ताकि निचले स्तर से लेकर उच्च पद तक के अधिकारियों के वेतन में एक समान और संतुलित वृद्धि हो सके।
सैलरी में कितनी होगी बढ़ोतरी: ₹34,500 तक हो सकता है न्यूनतम वेतन
8वें वेतन आयोग के लागू होने पर सबसे बड़ा बदलाव न्यूनतम वेतन में देखने को मिल सकता है। सूत्रों और जानकारों की मानें तो कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर ₹34,500 से ₹41,000 के बीच हो सकता है। इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) की भी व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि मौजूदा महंगाई दर को देखते हुए कर्मचारियों को पर्याप्त राहत दी जाए। साथ ही, बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदर्शन-आधारित इंसेंटिव (Performance Linked Incentive) देने पर भी विचार चल रहा है।
भत्तों की होगी छंटनी: 196 में से कई भत्ते हो सकते हैं खत्म
जिस तरह 7वें वेतन आयोग ने 196 भत्तों की समीक्षा के बाद 52 को समाप्त कर दिया था, वैसी ही कवायद इस बार भी होने वाली है। सरकार का इरादा वेतन संरचना को सरल और पारदर्शी बनाना है। ऐसी उम्मीद है कि टाइपिंग भत्ता या कुछ छोटे क्षेत्रीय भत्ते जो अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं, उन्हें पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या दूसरे बड़े भत्तों में मिला दिया जाएगा। इस बार भी विशेष ड्यूटी भत्ता और विभागीय भत्तों की बारीकी से जांच होगी। कर्मचारियों को मिलने वाला लाभ तो बढ़ेगा, लेकिन भत्तों की संख्या कम होकर कुछ महत्वपूर्ण श्रेणियों तक ही सीमित रह सकती है।
पेंशनभोगियों को भी बड़ी राहत: 65 लाख बुजुर्गों की बढ़ेगी पेंशन
8वें वेतन आयोग का लाभ केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करीब 65 लाख पेंशनभोगियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। नए वेतनमान के लागू होते ही पेंशन की गणना के फॉर्मूले में भी बदलाव होगा, जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों की मासिक आय में अच्छा खासा इजाफा होगा। सरकार चाहती है कि रिटायर्ड कर्मचारियों को चिकित्सा और अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त पेंशन मिले। 1 जनवरी से लागू होने वाले इस नए दौर के वेतनमान से मध्यम वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।



