
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के परिणामों को लेकर मचे घमासान के बीच अब हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और नियमों की अनदेखी को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और व्यापम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों ही पक्षों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। यह कानूनी कार्रवाई उन अभ्यर्थियों की उम्मीदों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है जो पिछले काफी समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।
पदों की संख्या और चयन सूची में बड़ा अंतर: 2007 के भर्ती नियमों के उल्लंघन का दावा
इस मामले में 10 अभ्यर्थियों ने सामूहिक रूप से याचिका दायर कर भर्ती नियमों में हेरफेर का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पुलिस विभाग ने कुल 5,967 पदों के लिए भर्ती निकाली थी, लेकिन जब चयन सूची जारी हुई तो उसमें केवल 2,500 अभ्यर्थियों के ही नाम शामिल थे। अभ्यर्थियों के अनुसार यह सीधे तौर पर ‘भर्ती नियम 2007’ का उल्लंघन है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि जब पद खाली थे और योग्य उम्मीदवार उपलब्ध थे, तो आधे से भी कम पदों पर सूची क्यों जारी की गई? बाकी बचे पदों का क्या हुआ और उन्हें क्यों नहीं भरा गया, इसे लेकर अभ्यर्थियों में गहरा रोष है।
अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद: व्यापम और शासन के जवाब पर टिकी सबकी निगाहें
हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अब गेंद सरकार और व्यापम के पाले में है। अब प्रशासन को यह साबित करना होगा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी और इसमें किसी भी नियम की अनदेखी नहीं की गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 हफ्ते बाद की तारीख तय की है। इस बीच, पुलिस आरक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं की नजरें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं। यदि सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो कोर्ट चयन प्रक्रिया पर कोई बड़ा फैसला भी सुना सकता है, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।



