
रायपुर: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे चार लोग पिछले चार वर्षों से सरकारी सेवा का लाभ उठा रहे थे। ये कर्मचारी न केवल स्कूलों और दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे रहे थे, बल्कि नियमित रूप से सरकारी खजाने से वेतन भी प्राप्त कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि इन नियुक्तियों के लिए आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के जाली हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया था। इस गंभीर धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए चारों आरोपियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
कैसे खुला जाली दस्तावेजों का खेल: बैंक के पत्र क्रमांक पर बना दी गई नियुक्ति की लिस्ट
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) लालजी द्विवेदी को इन नियुक्तियों की सत्यता पर संदेह हुआ। विभागीय जांच के दौरान जब राज्य शिक्षा आयोग के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो पता चला कि नियुक्ति आदेश पर दर्ज क्रमांक आयोग की फाइल में मौजूद ही नहीं है। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस डिस्पैच नंबर का उपयोग नियुक्ति के लिए किया गया था, वह रिकॉर्ड में बैंक ऑफ बड़ौदा को भेजे गए एक सामान्य पत्र के लिए आवंटित था। हस्ताक्षर के मिलान में भी भारी अंतर पाए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पूरे तंत्र को धोखा देकर यह फर्जीवाड़ा किया गया था।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों का विवरण: इन पदों पर फर्जी तरीके से थे तैनात
जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने उन चार मुख्य नामों की सूची जारी की है जो सितंबर 2021 से इस फर्जीवाड़े का हिस्सा थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनकी जॉइनिंग से लेकर अब तक के पूरे रिकॉर्ड को रद्द माना जाएगा।
- टीकमचंद साहू: हाईस्कूल मोहगांव में सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदस्थ थे।
- फगेंद्र सिन्हा: उच्चतर माध्यमिक शाला बकरकट्टा में सहायक ग्रेड-3 के रूप में कार्यरत थे।
- रजिया अहमद: उच्चतर माध्यमिक शाला पैलीमेटा में सहायक ग्रेड-3 की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
- अजहर अहमद: बीईओ कार्यालय छुईखदान में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात थे।
अफसरों की भूमिका पर भी गहराया शक: अब होगी एफआईआर और विभागीय रिकवरी की तैयारी
विभाग अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि आखिर चार साल तक बिना किसी सत्यापन के ये कर्मचारी सिस्टम में कैसे बने रहे। संदेह की सुई उन स्थानीय अधिकारियों की ओर भी घूम रही है जिन्होंने जॉइनिंग के समय दस्तावेजों की बारीकी से जांच नहीं की। सूत्रों के मुताबिक, बर्खास्तगी के बाद अब इन चारों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही, पिछले चार वर्षों में इनके द्वारा आहरित किए गए वेतन की वसूली के लिए भी कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शासन अब प्रदेश भर में इस तरह के अन्य संदिग्ध नियुक्ति आदेशों की जांच की योजना बना रहा है।
Also Read: Teacher Bharti Scams: 2007 के शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में कार्रवाई तेज, तीन आरोपी गिरफ्तार



