
रायपुर जिले में 3 जनवरी 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हुई है। जिले के 116 अधिकारियों की देखरेख में चल रही इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाना है, लेकिन पहले ही दिन से मतदाताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जोन कार्यालयों में तैनात अधिकारी नियमों की गलत व्याख्या कर रहे हैं, जिससे अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने पहुंचे नागरिकों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
आधार और राशन कार्ड जैसे वैध दस्तावेजों की अनदेखी
निर्वाचन नियमों के अनुसार, जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है या जिन्हें नोटिस मिला है, वे निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई भी एक मान्य दस्तावेज जमा कर अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके बावजूद, कई जोन कार्यालयों में आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अमान्य बताकर स्वीकार नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों का यह अड़ियल रवैया न केवल निर्वाचन प्रक्रिया को बाधित कर रहा है, बल्कि आम जनता में प्रशासन के प्रति असंतोष भी पैदा कर रहा है।
पुरानी सूचियों और जटिल प्रमाणों की मांग से बढ़ी परेशानी
जोन-5 सहित कई केंद्रों पर स्थिति और भी पेचीदा हो गई है। वहां तैनात अधिकारी मतदाताओं से 2003 की मतदाता सूची में नाम होने का प्रमाण मांग रहे हैं। इसके अलावा, कई लोग अपना शैक्षणिक प्रमाण पत्र (मार्कशीट) लेकर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी यह कहकर लौटा दिया गया कि यह पर्याप्त नहीं है। यह समझ से परे है कि यदि किसी मतदाता के पास वर्तमान के वैध सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, तो उससे दशकों पुरानी सूची का प्रमाण क्यों मांगा जा रहा है।
नोटिस का बढ़ता दायरा और लंबित सुनवाई के आंकड़े
निर्वाचन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर जिले में अब तक लगभग 5,000 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से अब तक केवल 800 मतदाताओं की ही सुनवाई की जा सकी है। आने वाले समय में यह चुनौती और भी विकराल होने वाली है क्योंकि जिले में ‘सी’ कैटेगरी के तहत करीब 1,33,053 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की योजना है। यदि शुरुआती स्तर पर ही दस्तावेजों को लेकर इतनी विसंगतियां रहेंगी, तो इतनी बड़ी संख्या में दावों का निपटारा करना असंभव हो जाएगा।
मतदाता सूची के लिए मान्य अनिवार्य दस्तावेजों की सूची
मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नीचे दिए गए 13 दस्तावेजों में से कोई भी एक प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न किया जा सकता है। यदि अधिकारियों द्वारा इन्हें स्वीकार करने से मना किया जाता है, तो मतदाता उच्च अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं। मान्य दस्तावेजों की सूची इस प्रकार है:
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र।
- पासपोर्ट, जो नागरिकता और जन्मतिथि का ठोस प्रमाण है।
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र: मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन (10वीं) या अन्य प्रमाण पत्र।
- पहचान पत्र: केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) द्वारा नियमित कर्मचारियों या पेंशनभोगियों को जारी आईडी कार्ड।
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र (सक्षम राज्य अधिकारी द्वारा जारी)।
- जाति प्रमाण पत्र: सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र।
- पुराने दस्तावेज: 01.07.1987 से पूर्व किसी सरकारी निकाय, बैंक, डाकघर या एलआईसी द्वारा जारी पहचान पत्र।
- संपत्ति संबंधी कागज: सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र।
- वन अधिकार प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की प्रति।
- आधार कार्ड (निर्वाचन आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार)।



