
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धान खरीदी और भंडारण में हुई करोड़ों की गड़बड़ी पर प्रशासन ने हंटर चला दिया है। जिले के बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र से भारी मात्रा में धान गायब होने के मामले में प्रभारी प्रितेश पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही जिला विपणन अधिकारी (DMO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। दरअसल, केंद्र प्रभारी ने गायब धान के पीछे चूहे, दीमक और कीटों का बहाना बनाया था, जिसे प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। जिला प्रशासन ने इस मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जो पूरे प्रकरण की बारीकी से छानबीन करेगी।
7 करोड़ की चपत का गणित: बाजार चारभाठा और बघर्रा केंद्र से 26 हजार क्विंटल धान गायब, वजन में भारी कमी ने खोली पोल
घोटाले की परतें। धान चोरी का यह मामला तब खुला जब संग्रहण केंद्रों में रखे स्टॉक का मिलान किया गया। जांच में पता चला कि कबीरधाम के दो प्रमुख केंद्रों बाजार चारभाठा और बघर्रा से करीब 26 हजार क्विंटल धान कम है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये है। आंकड़ों के मुताबिक, इन केंद्रों में कुल 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान रखा गया था। जब मिलिंग के लिए धान का उठाव शुरू हुआ, तो अकेले बाजार चारभाठा केंद्र से ही 22 हजार क्विंटल अनाज गायब मिला। शुरुआत में इसे ‘सूखत’ (नमी के कारण वजन कम होना) बताया गया, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में कमी ने भ्रष्टाचार के संकेतों को पुख्ता कर दिया है।
फर्जी बिल और सीसीटीवी से छेड़छाड़: कागजों पर दिखाई गई धान की आवक, मजदूरों की हाजिरी में भी हुआ फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण कमी नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। आरोप है कि संग्रहण केंद्र प्रभारी ने उपार्जन केंद्रों के साथ मिलकर धान की फर्जी आवक और जावक (In-Out) दिखाई। इसके अलावा, खराब या डैमेज धान की खरीदी के फर्जी बिल तैयार किए गए और मजदूरों की झूठी हाजिरी लगाकर सरकारी पैसे का बंदरबांट किया गया। सबूत मिटाने के लिए केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ बार-बार छेड़छाड़ की गई ताकि संदिग्ध गतिविधियों का कोई रिकॉर्ड न रहे। अनुमान है कि इस सुनियोजित तरीके से केवल एक केंद्र पर ही करीब 5 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है।
डीएमओ का बचाव और विभाग की जांच: ‘प्रदेश के अन्य जिलों से बेहतर स्थिति’ का दावा, सहायक खाद्य अधिकारी ने कहा- आरोप बेहद गंभीर
इस मामले में जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि धान की कमी मौसम के प्रभाव और चूहों के नुकसान की वजह से हुई है। उन्होंने तो यहां तक दावा कर दिया कि प्रदेश के अन्य 65 केंद्रों की तुलना में कबीरधाम की स्थिति काफी बेहतर है। हालांकि, सहायक जिला खाद्य अधिकारी इस दलील से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि शिकायतें अत्यंत गंभीर हैं और प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। जांच दल अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहा है कि क्या यह धान वास्तव में मिलर्स के पास पहुंचा दिया गया या सीधे बाजार में बेच दिया गया।
भंडारण व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल: क्या जांच समिति करेगी असली चेहरों का खुलासा? अगली कार्रवाई का सबको इंतजार
कबीरधाम का यह धान घोटाला प्रदेश की उपार्जन और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्रभारी के ‘चूहे और दीमक’ वाले तर्क को मान भी लिया जाए, तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का नुकसान सुरक्षा और रखरखाव की भारी लापरवाही को दर्शाता है। फिलहाल, पूरी कार्रवाई अब जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से जिले के अन्य संग्रहण केंद्रों में भी हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।



