
रायपुर: छत्तीसगढ़ के कद्दावर आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण की निविदाओं में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने सीधे तौर पर विभाग के प्रमुख अभियंता केके कटारे को निशाने पर लेते हुए कहा है कि करीब 2500 करोड़ रुपये के टेंडर में नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कंवर ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे टेंडर प्रक्रिया की जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
सिर्फ तीन कंपनियों को लाभ देने की रची गई साजिश
ननकीराम कंवर ने निविदा शर्तों में की गई कमियों को बिंदुवार उजागर करते हुए बताया कि सात अलग-अलग एनआईटी (1076 से 1082) के जरिए कुछ खास कंपनियों को ही टेंडर दिलाने का खेल खेला जा रहा है। उनके अनुसार, विभाग की शर्तें इस तरह बनाई गई हैं कि केवल तीन कंपनियां—हिंलब्रो प्रोजेक्ट लिमिटेड, मेसर्स सुनील अग्रवाल और मेसर्स रत्ना खनिज ही प्रतिस्पर्धा में बनी रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रमुख अभियंता केके कटारे अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर पुरानी शिकायतों को दबाते आए हैं और अब पद का दुरुपयोग कर आदिवासी क्षेत्रों के लिए आए बजट में बंदरबांट की तैयारी कर रहे हैं।
भाजपा एसटी मोर्चा ने भी उठाई जांच की मांग
इस विवाद में अब भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा भी खुलकर सामने आ गया है। मोर्चा के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र माहला ने पूर्व मंत्री के आरोपों का समर्थन करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों के विकास के लिए स्वीकृत राशि में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। माहला ने भी प्रमुख अभियंता को जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से जांच शुरू करने और निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है। संगठन के भीतर से उठ रही इन आवाजों ने प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है।
बिल्डर्स एसोसिएशन ने टेंडर शर्तों पर खड़े किए सवाल
भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के रायपुर सेंटर ने भी तकनीकी खामियों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील अग्रवाल ने दिल्ली स्थित एनआरआरडीए (NRRDA) के महानिदेशक से शिकायत करते हुए कहा है कि जारी किए गए निविदा दस्तावेज राष्ट्रीय खरीद मानकों के अनुरूप नहीं हैं। उनका तर्क है कि टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं जो पारदर्शी भागीदारी को रोकती हैं और ईमानदार ठेकेदारों को रेस से बाहर कर देती हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि विसंगतियों को दूर किए बिना टेंडर प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।
सरकार की छवि और विकास कार्यों पर संकट
आदिवासी क्षेत्रों में सड़कों के जाल बिछाने के लिए स्वीकृत 2500 करोड़ की यह राशि अब विवादों के घेरे में है। पूर्व मंत्री कंवर का कहना है कि अगर चहेते ठेकेदारों को अधिक दर पर काम दिया गया, तो यह सरकारी खजाने को सीधा चूना लगाने जैसा होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार के इन तरीकों से न केवल सरकार की छवि खराब हो रही है, बल्कि विकास कार्य की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ेगा। फिलहाल, शासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दिल्ली तक पहुंची शिकायतों के बाद विभाग में बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।



