
धमतरी जिले के कुरूद में 27 जनवरी की तारीख एक नई बौद्धिक क्रांति के रूप में दर्ज हो गई। अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में पूर्व मंत्री और विधायक अजय चंद्राकर के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं, व्यापारियों और गृहणियों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंच पर जब मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विवेक बिंद्रा पहुंचे, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। डॉ. बिंद्रा ने अपनी चिर-परिचित शैली में लोगों को जीवन की बाधाओं को पार कर आगे बढ़ने का हौसला दिया और बताया कि कैसे छोटी सोच को बदलकर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

माता-पिता को नसीहत और संगत की चेतावनी
डॉ. बिंद्रा ने सीधे तौर पर पालकों और युवाओं को संबोधित करते हुए ‘संगत’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में आगाह किया कि अगर आप पांच शराबियों के साथ उठेंगे-बैठेंगे, तो छठे शराबी आप ही होंगे। उन्होंने समाज में मौजूद नकारात्मक लोगों की तुलना ‘शकुनि’ और ‘मंथरा’ से करते हुए कहा कि ये लोग आपके बच्चों के भविष्य और उनके सोचने के तरीके को खराब कर रहे हैं। पालकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सीमाओं में बांधने के बजाय उन्हें उड़ने के लिए सही माहौल और संस्कार दें, ताकि वे किसी के बहकावे में न आएं।

व्यापारियों को गुरुमंत्र: ग्राहकों की सही पहचान जरूरी
कुरूद के व्यापारिक समुदाय के लिए डॉ. बिंद्रा का अंदाज काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने स्थानीय भाषा और उदाहरणों का सहारा लेते हुए समझाया कि गल्ले पर बैठने मात्र से धंधा नहीं चमकता। उन्होंने व्यापारियों को सावधान करते हुए कहा कि कुछ ग्राहक ‘गाय’ की तरह होते हैं जिनसे भुगतान मांगना पड़ता है, तो कुछ खुद समय पर पैसे देते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा खतरनाक ‘बैल’ प्रवृत्ति के ग्राहक होते हैं, जो केवल आपका कीमती समय बर्बाद करते हैं और बदले में कुछ नहीं देते। सफल व्यापारी वही है जो ऐसे लोगों को पहचान कर अपना समय सही जगह निवेश करे।
छात्रों के लिए सीख: डिग्री से ज्यादा रफ्तार का महत्व
मैदान में मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं को करियर की राह दिखाते हुए डॉ. बिंद्रा ने कहा कि आज के दौर में यह जरूरी नहीं कि आप पहले आए हैं या बाद में, बल्कि यह जरूरी है कि आप कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने गूगल का उदाहरण देते हुए बताया कि वह 18वें नंबर का सर्च इंजन था, लेकिन अपनी रफ्तार और तकनीक से उसने सबको पीछे छोड़ दिया। छात्रों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि अपनी कमियों पर काम करें और सचिन तेंदुलकर की तरह हर ‘बाउंसर’ गेंद का सामना करने के लिए खुद को तैयार रखें।

हनुमान जी से सीखें प्रोफेशनल वर्क एथिक्स
काम के प्रति समर्पण और प्रोफेशनल व्यवहार पर बात करते हुए डॉ. बिंद्रा ने हनुमान जी का प्रेरक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने की बात आई, तो हनुमान जी ने यह नहीं कहा कि उनकी ड्यूटी केवल श्रीलंका तक सीमित है। उन्होंने बिना किसी शिकायत के परिस्थिति का समाधान निकाला। आज के युवाओं को भी ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड’ यानी समस्या के बजाय समाधान पर ध्यान देने वाला बनना होगा। नौकरी के बाजार में वही टिकेगा जो अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएगा।
अजय चंद्राकर का विजन: कुरूद से निकलेंगे भविष्य के सितारे
कार्यक्रम के समापन पर विधायक अजय चंद्राकर ने इस भव्य आयोजन के पीछे के अपने विजन को साझा किया। उन्होंने कहा कि यह भीड़ केवल किसी नेता को सुनने नहीं, बल्कि कुरूद की प्रतिभा को नई दिशा देने के लिए जुटी है। चंद्राकर ने उम्मीद जताई कि यहां के बच्चे केवल डिग्रियां हासिल करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डॉ. बिंद्रा के विचारों से सीख लेकर देश के पटल पर सुपरस्टार बनकर उभरेंगे। उनका लक्ष्य कुरूद को एक ऐसा केंद्र बनाना है जहां से नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले उद्यमी तैयार हों।



