
छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक’ को लेकर सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मंत्रालय में आयोजित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक में इस कानून के कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा और उपमुख्यमंत्री अरुण साव समेत कई कैबिनेट मंत्री शामिल हुए। मंत्रियों ने साफ तौर पर संदेश दिया कि यह कानून किसी विशेष धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रलोभन और दबाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
कोर्ट की चुनौतियों को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम
बैठक में मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि विधेयक को संवैधानिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाए कि इसे अदालत में चुनौती न दी जा सके। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां सबको अपने धर्म के प्रचार का हक है, लेकिन किसी को डरा-धमकाकर या लालच देकर धर्म बदलवाना पूरी तरह गलत है। समिति अन्य राज्यों में लागू इसी तरह के कानूनों का अध्ययन कर रही है ताकि छत्तीसगढ़ का विधेयक तर्कसंगत और त्रुटिहीन रहे। सरकार का मानना है कि सावधानी से तैयार किया गया मसौदा ही कानूनी लड़ाई में टिक पाएगा।
बजट सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
सूत्रों के मुताबिक सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को फरवरी-मार्च 2026 में होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पेश करने की योजना बना रही है। आदिवासी क्षेत्रों से लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए इस कानून को बेहद प्रभावी बनाने की तैयारी है। उप-समिति अभी कुछ और बैठकें करेगी ताकि अंतिम मसौदा तैयार करने से पहले सभी बारीकियों को सुलझाया जा सके। सरकार का दावा है कि यह कानून राज्य में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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