
EMRS Result 2025: एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) स्टाफ सिलेक्शन परीक्षा 2025 के पहले चरण के नतीजों ने देशभर में हलचल मचा दी है। प्रिंसिपल जैसे ऊंचे और जिम्मेदारी वाले पद के लिए महज 1 अंक पाने वाले उम्मीदवार को भी अगले दौर के लिए चुन लिया गया है। इस परिणाम ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि जब चयन के मानक इतने गिर जाएंगे, तो स्कूलों के भविष्य का क्या होगा।
महज 1 अंक पर टियर-2 का टिकट
भर्ती के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रिंसिपल पद के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का एक उम्मीदवार सिर्फ 1 नंबर पाकर टियर-2 परीक्षा के लिए क्वालीफाई हो गया है। वहीं अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए यह आंकड़ा केवल 4 नंबर रहा। हैरानी की बात यह है कि यदि ये उम्मीदवार अंतिम रूप से चुन लिए जाते हैं, तो इन्हें महीने की 1 लाख रुपये से ज्यादा सैलरी मिलेगी। बिना किसी न्यूनतम योग्यता अंक (Minimum Qualifying Marks) के इस तरह का चयन चर्चा का विषय बना हुआ है।
माइनस में गया स्टाफ नर्स का कटऑफ
भर्ती का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा स्टाफ नर्स (महिला) पद के लिए रहा। यहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कटऑफ माइनस 13.333 तक गिर गया है। चूंकि परीक्षा में गलत उत्तर देने पर एक-तिहाई अंक काटने का प्रावधान था, इसलिए कई उम्मीदवारों के नंबर जीरो से भी नीचे चले गए। इसके बावजूद, पदों की संख्या भरने के चक्कर में इन्हें अगले चरण के लिए योग्य मान लिया गया है।
पदों का विवरण और चयन प्रक्रिया
इस भर्ती अभियान के जरिए देशभर के 690 एकलव्य स्कूलों में कुल 7,267 पदों को भरा जाना है। इसमें प्रिंसिपल के 225 पद शामिल हैं, जिसके लिए 10 गुना यानी 2,250 अभ्यर्थियों को दूसरे चरण के लिए बुलाया गया है। प्रिंसिपल का चयन तीन स्तरों (टियर-1, टियर-2 और इंटरव्यू) पर होना है, जबकि अन्य पदों के लिए दो ही चरण रखे गए हैं।
विशेषज्ञों ने जताई कड़ी नाराजगी
प्रशासनिक विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने इस रिजल्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व अपर मुख्य सचिव बी.के. सरे का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित भर्ती में एक ‘बेंचमार्क’ होना जरूरी है। बिना किसी न्यूनतम अंक के केवल आवेदकों की संख्या पूरी करना औपचारिकता मात्र है। इससे न केवल सिस्टम की साख गिरती है, बल्कि उन मेधावी छात्रों के साथ भी अन्याय होता है जो कड़ी मेहनत करते हैं।
लाखों में होगी शुरुआती सैलरी
विवादों के बीच इन पदों पर मिलने वाला वेतन काफी आकर्षक है। प्रिंसिपल पद पर तैनात होने वाले व्यक्ति का मूल वेतन ही 78,800 रुपये से शुरू होकर 2,09,200 रुपये तक जाता है। भत्ते मिलाकर यह राशि एक लाख रुपये के पार पहुंच जाती है। इसी तरह पीजीटी और टीजीटी पदों के लिए भी शानदार पे-स्केल निर्धारित है। इतनी बड़ी जिम्मेदारी और मोटी सैलरी वाले पदों पर बेहद कम अंक वालों के चयन से आम जनता में भी रोष है।
| पद का नाम (Post Name) | पे-लेवल (Pay Level) | वेतनमान (Pay Scale – ₹) | अनुमानित कुल वेतन (Gross Salary) |
| प्रिंसिपल (Principal) | लेवल 12 | ₹78,800 – ₹2,09,200 | ₹1,00,000+ प्रति माह |
| पीजीटी (PGT) | लेवल 8 | ₹47,600 – ₹1,51,100 | ₹65,000 – ₹75,000 |
| टीजीटी (TGT) | लेवल 7 | ₹44,900 – ₹1,42,400 | ₹60,000 – ₹70,000 |
| स्टाफ नर्स (Staff Nurse) | लेवल 5 | ₹29,200 – ₹92,300 | ₹45,000 – ₹50,000 |
| हॉस्टल वार्डन (Warden) | लेवल 5 | ₹29,200 – ₹92,300 | ₹45,000 – ₹50,000 |
शिक्षा की गुणवत्ता पर मंडराया संकट
एकलव्य स्कूलों का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को बेहतरीन शिक्षा देना है। लेकिन अगर इन स्कूलों की कमान संभालने वाले और पढ़ाने वाले ही बिना किसी कड़े मापदंड के चुने जाएंगे, तो बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होना तय है। फिलहाल अभ्यर्थी और एक्सपर्ट्स मांग कर रहे हैं कि भर्ती के नियमों में बदलाव कर एक सम्मानजनक न्यूनतम स्कोर तय किया जाए ताकि केवल योग्य लोग ही सिस्टम का हिस्सा बन सकें।



