VIDEO:धमतरी जिले में मां से बिछड़कर खेत में पहुंचा तेंदुए का नन्हा शावक: ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर किया सुरक्षित रेस्क्यू

धमतरी जिले के नगरी-सिहावा इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया जब ग्रामीणों ने खेत में तेंदुए का एक छोटा बच्चा घूमते देखा। बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र के ग्राम छिपली पारा में मिले इस शावक की उम्र महज 4 महीने बताई जा रही है। श्रृंगी ऋषि पहाड़ी की तराई में बसे इस गांव के लोग शावक को देखते ही चौकन्ने हो गए। राहत की बात यह रही कि ग्रामीणों ने शावक को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और तुरंत इसकी जानकारी वन विभाग को दी।

अपनी मां से बिछड़कर भटक गया था शावक

नगरी-सिहावा का पहाड़ी क्षेत्र तेंदुओं का प्राकृतिक घर माना जाता है। वन विभाग का अनुमान है कि शिकार या पानी की तलाश में मादा तेंदुआ अपने बच्चे के साथ पहाड़ी से नीचे आई होगी और इसी दौरान यह शावक अपनी मां से बिछड़कर रिहायशी इलाके के करीब पहुंच गया। शावक को अकेला पाकर स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और वन विभाग की टीम के पहुंचने तक उस पर नजर बनाए रखी ताकि वह किसी खतरे में न पड़े।

वन विभाग की टीम ने किया सफल रेस्क्यू

सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों की मदद से नन्हे शावक को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में लिया गया। रेंज अधिकारी सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में चली इस मुहिम में वन कर्मियों ने सावधानी बरती ताकि शावक डरे नहीं। विभाग ने ग्रामीणों की इस संवेदनशीलता की जमकर तारीफ की है क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में लोग डर के मारे वन्यजीवों पर हमला कर देते हैं।

नगरी अस्पताल में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

रेस्क्यू के तुरंत बाद शावक को नगरी के सरकारी पशु चिकित्सालय ले जाया गया। वहां मौजूद अनुभवी डॉक्टरों ने शावक की आंखों, पंजों और उसके वजन की जांच की। शुरुआती जांच में शावक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है और उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। डॉक्टरों ने बताया कि वह काफी सक्रिय है लेकिन मां से दूर होने की वजह से थोड़ा घबराया हुआ नजर आ रहा है।

अब ‘जंगल सफारी’ बनेगा नया ठिकाना

उच्च अधिकारियों से चर्चा करने के बाद यह तय किया गया कि शावक की बेहतर देखभाल के लिए उसे नया रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी भेजा जाए। सुरक्षित वाहन के जरिए शावक को रायपुर रवाना कर दिया गया है। जंगल सफारी में शावक को कुछ दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा और वहां के विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी डाइट और स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे। शावक के आने से सफारी प्रबंधन में भी काफी उत्साह है।

ग्रामीणों की सुरक्षा और गश्त में इजाफा

इस घटना के बाद वन विभाग ने छिपली पारा और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। विभाग को अंदेशा है कि शावक की मां उसे ढूंढते हुए दोबारा गांव की तरफ आ सकती है। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को अकेले जंगल की तरफ न जाने और रात में सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही विभाग की एक टीम लगातार पहाड़ी के नीचे वाले इलाकों में ट्रैप कैमरे लगा रही है ताकि मादा तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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