
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत में सरकारी पैसे की बंदरबांट का एक बड़ा मामला सुलझ गया है। पुलिस ने वित्तीय अनियमितता के आरोप में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण कुमार मरकाम को गिरफ्तार कर लिया है। मरकाम पर आरोप है कि उन्होंने साल 2014-15 के दौरान मुरुम मिट्टी और सड़क निर्माण के नाम पर फर्जी बिल पास कराए। दस्तावेजों में हेराफेरी कर करीब 30 लाख रुपये से ज्यादा की राशि का निजी स्वार्थ के लिए गबन किया गया था।
साल 2020 में दर्ज हुई थी पुलिस रिपोर्ट
इस भ्रष्टाचार की कहानी तब सामने आई जब विभाग ने आंतरिक जांच के बाद साक्ष्य पेश किए। साल 2020 में वाड्रफनगर थाने में मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी अश्विनी कुमार तिवारी और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच की कड़ियां जोड़ते हुए पाया कि निर्माण कार्य केवल कागजों पर हुए थे और भुगतान असली ठेकेदारों के बजाय फर्जी खातों में किया गया था।
मनरेगा अधिकारी की गवाही ने खोला राज
प्रकरण की जांच के दौरान सबसे पहले कार्यक्रम अधिकारी अश्विनी कुमार तिवारी को पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान तिवारी ने खुलासा किया कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड तत्कालीन सीईओ एस.के. मरकाम थे। उसने बताया कि मरकाम की सहमति और मिलीभगत से ही भुगतान के चेक जारी किए गए थे। इस बयान के बाद पुलिस ने मरकाम की तलाश तेज कर दी थी, लेकिन वे लंबे समय से अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए ठिकाने बदल रहे थे।
जेल जा चुके हैं सप्लायर और रोजगार सहायक
इस 30 लाख के गबन मामले में पुलिस अब तक कई चेहरों को बेनकाब कर चुकी है। घोटाले में मदद करने वाले सप्लायर हरिहर यादव, कुंजलाल साहू और रोजगार सहायक गिरीश यादव को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गवाहों के बयान न्यायालय में भी दर्ज कराए हैं। अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे जिन्होंने जनता के पैसे को आपस में बांट लिया।
अंबिकापुर से हुई पूर्व सीईओ की गिरफ्तारी
सालों से फरार चल रहे श्रवण कुमार मरकाम को आखिरकार पुलिस ने अंबिकापुर के गांधीनगर इलाके से ढूंढ निकाला। 62 वर्षीय मरकाम वहां छिपकर रह रहे थे। पुलिस टीम उन्हें हिरासत में लेकर वाड्रफनगर आई, जहां कड़ी पूछताछ के बाद उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस ने मरकाम को विधिवत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
प्रशासनिक महकमे में मची अफरा-तफरी
एक पूर्व बड़े अधिकारी की इस तरह गिरफ्तारी होने से बलरामपुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है। इस घोटाले में शामिल कुछ अन्य छोटे कर्मचारियों और सप्लायर्स की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गबन की गई राशि का निवेश कहां किया गया है।



