
रायपुर में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। पिछले दो महीनों से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रहे युवा आज मंत्रालय का घेराव करने निकले। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सड़क पर ट्रकों को बैरिकेड की तरह खड़ा कर दिया। इस दौरान पुलिस और युवाओं के बीच काफी धक्का-मुक्की हुई और इलाके में भारी तनाव की स्थिति बनी रही।
खाली पड़े 2300 पदों पर अटकी है नियुक्ति
यह पूरा विवाद सहायक शिक्षक भर्ती 2023 से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षा विभाग के पास लगभग 1300 से 2300 पद अब भी रिक्त हैं, लेकिन विभाग इन पर नियुक्ति नहीं दे रहा है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशानुसार प्राथमिक स्कूलों में डीएड डिग्री धारकों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस आदेश के बाद बीएड धारकों को पद से हटा तो दिया गया, लेकिन उनकी जगह पात्र डीएड उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं की गई है।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
आंदोलनकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उच्च अदालतों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन जानबूझकर देरी कर रहा है। अभ्यर्थियों ने अप्रैल 2024 और अगस्त 2024 जैसे कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानूनी जीत के बाद भी उन्हें सड़कों पर बैठना पड़ रहा है। युवाओं का कहना है कि जब तक उनके हाथों में नियुक्ति पत्र नहीं आएगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन ने हालांकि कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है।

160 अभ्यर्थियों की बिगड़ी तबीयत, आत्मदाह की कोशिश
तूता में चल रहा यह आमरण अनशन अब जानलेवा साबित हो रहा है। पिछले 60 दिनों में भूख हड़ताल के कारण 160 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत खराब हो चुकी है, जिनमें से कई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। हाल ही में कुछ प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश भी की थी। युवाओं का कहना है कि वे अपने हक की लड़ाई में जान तक देने को तैयार हैं, लेकिन शासन की चुप्पी उन्हें और ज्यादा आक्रोशित कर रही है।
शिक्षा मंत्री की चुप्पी पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारी युवाओं ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभाग के बड़े अधिकारियों के मौन रहने पर सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों ने पूछा कि इतने बड़े आंदोलन के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री उनसे बात करने क्यों नहीं आ रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अनशन के दौरान किसी भी अभ्यर्थी की जान जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की होगी। विपक्ष के नेताओं ने भी धरना स्थल पहुंचकर युवाओं की मांगों का समर्थन किया है।

तत्काल नियुक्ति की मांग पर अड़े युवा
डीएड अभ्यर्थियों की एकमात्र मांग शेष रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की है। उनका कहना है कि वे तीन साल से कानूनी और मानसिक लड़ाई लड़ रहे हैं और अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों से नहीं मानेंगे, उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए। मंत्रालय की ओर बढ़ने की इस कोशिश ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं और नवा रायपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।



