
राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 के पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी ने अदालत में करीब 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान पेश किया है। यह कार्रवाई Economic Offences Wing & Anti Corruption Bureau Chhattisgarh ने की है। मामला परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर आने से जुड़ा है, जिसकी वजह से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए थे।
दो सहायक सांख्यिकी अधिकारी आरोपी
इस प्रकरण में सहायक सांख्यिकी अधिकारी Virendra Jatav और Hemant Kumar Kaushik को आरोपी बनाया गया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू में दर्ज अपराध क्रमांक 64/2025 के तहत दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
परीक्षा से पहले लीक हुआ प्रश्नपत्र
जांच में सामने आया है कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 7 जनवरी 2024 को होनी थी। आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया। बताया गया है कि विरेंद्र जाटव ने एक वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर प्रश्नपत्र टाइप किया था। इसी दौरान गोपनीयता भंग हुई और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक प्रश्न पहुंचाए गए।
पैसों के बदले बांटे गए प्रश्न
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने अभ्यर्थियों से रकम लेकर प्रश्नपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराईं। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र मिला था। डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच से इस दावे को मजबूती मिली है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले अहम सबूत
जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए। कॉल रिकॉर्ड और संदेशों से संकेत मिला कि प्रश्नपत्र अलग-अलग माध्यमों से साझा किया गया। एजेंसी को ऐसे प्रमाण भी मिले हैं, जिनसे आर्थिक लेनदेन की बात सामने आती है।
होटलों और फार्म हाउस में हुई मुलाकातें
विवेचना में यह भी पता चला कि कुछ अभ्यर्थी समूह में अलग-अलग जिलों से आए थे। आरोप है कि उन्हें अलग-अलग होटलों में ठहराया गया और वहीं प्रश्न पढ़कर नोट कराए गए। परीक्षा से पहले लिखे गए प्रश्नों को नष्ट करने के निर्देश भी दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के परिचित और रिश्तेदार इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे थे।
लोकेशन और सीडीआर से जुड़ी कड़ियां
तकनीकी विश्लेषण के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन डेटा की जांच की गई। परीक्षा से एक रात पहले कई अभ्यर्थियों और आरोपियों की लोकेशन एक जैसी पाई गई। यह भी संकेत मिला कि आरोपी परीक्षा से पहले होटलों और रिसॉर्ट्स में आना-जाना कर रहे थे, जहां अभ्यर्थी ठहरे हुए थे।
परिणामों में भी दिखी समानता, जांच जारी
जांच एजेंसी ने परीक्षा परिणामों और उत्तर पुस्तिकाओं का भी विश्लेषण किया। जिन अभ्यर्थियों के साथ ठहरने के प्रमाण मिले, उनके अंकों और उत्तरों के पैटर्न में काफी समानता पाई गई। इससे लीक प्रश्नपत्र के प्रभाव की पुष्टि हुई है। फिलहाल मनी ट्रेल और अन्य संभावित संलिप्त अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे की विवेचना की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चालान भी पेश किए जा सकते हैं।
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