धमतरी के लिए बड़ी खबर: जिले में खुलेगा पहला सैनिक स्कूल, शासन ने प्रस्ताव को दी हरी झंडी

Military School Dhamtari: धमतरी जिला बने 28 साल का लंबा समय बीत चुका है। इन सालों में विकास के कई काम हुए लेकिन शिक्षा के मामले में जिले को अब तक कोई बड़ी सौगात नहीं मिली थी। यही वजह है कि आज भी जिले के हजारों बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। अब इस स्थिति में बड़ा बदलाव आने वाला है। लोक शिक्षण संचालनालय ने धमतरी में सैनिक स्कूल खोलने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। इस फैसले से जिले में स्कूली शिक्षा का स्तर सुधरेगा और स्थानीय बच्चों को बेहतर भविष्य मिलेगा।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के प्रस्ताव पर लगी मुहर

इस स्कूल को खोलने की पहल धमतरी के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने की थी। उन्होंने जिले में जमीन की उपलब्धता और यहां रहने वाले पूर्व सैनिकों के परिवारों की संख्या को आधार बनाकर शासन को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद संचालनालय ने अपनी मंजूरी दे दी है। अब संचालनालय के संचालक ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आगे की कार्यवाही शुरू करने को कहा है। जल्द ही विभाग के जरिए जमीन और भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सेना में अधिकारी बनने के लिए तैयार होंगे छात्र

सैनिक स्कूल की पहचान बच्चों को देश सेवा के लिए तैयार करने वाले केंद्र के रूप में होती है। यहां छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान दिया जाता है बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से इतना अनुशासित बनाया जाता है कि वे आगे चलकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और नौसेना अकादमी में प्रवेश पा सकें। यहां पढ़ने वाले छात्र थल सेना, वायु सेना और नौसेना में अधिकारी बन सकते हैं। इसके अलावा सिविल सेवा, कॉर्पोरेट प्रबंधन और खेल जैसे क्षेत्रों में भी यहां के बच्चे शानदार प्रदर्शन करते हैं।

प्रवेश प्रक्रिया और स्कूल का खास माहौल

धमतरी में खुलने वाला यह स्कूल पूरी तरह से आवासीय होगा। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कराई जाएगी जिसमें अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन होगा। स्कूल में दाखिला लेने के लिए बच्चों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी और मेरिट लिस्ट के साथ-साथ मेडिकल फिटनेस के आधार पर ही चयन किया जाएगा। शिक्षा के अलावा यहां बच्चों को एनसीसी, खेलकूद और निशानेबाजी जैसी ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आवासीय स्कूल होने की वजह से बच्चों में टीम वर्क और आपसी तालमेल की भावना तेजी से विकसित होती है।

आरक्षित सीटें और वित्तीय सहायता का लाभ

सैनिक स्कूल में समाज के विभिन्न वर्गों के लिए सीटों का आरक्षण भी रहता है। अनुसूचित जाति और जनजाति के अलावा सैनिकों के बच्चों के लिए भी विशेष रूप से सीटें सुरक्षित रखी जाती हैं। योग्य और प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति और आर्थिक मदद भी दी जाती है। इस स्कूल के शुरू होने से न केवल देशभक्ति का जज्बा बढ़ेगा बल्कि बच्चों को एक ऐसा माहौल मिलेगा जहां वे कड़े अनुशासन के बीच अपना व्यक्तित्व निखार सकेंगे। धमतरी की जनता को अब इसके धरातल पर उतरने का इंतजार है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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