
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के सरकारी संग्रहण केंद्रों से लगभग 21 करोड़ रुपये की कीमत का 66,680 क्विंटल धान रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। धान के उठाव के बाद जब स्टॉक का मिलान किया गया, तब अधिकारियों के होश उड़ गए। इतनी भारी मात्रा में अनाज का कम होना किसी छोटी चूक की ओर नहीं बल्कि एक सुनियोजित घोटाले की ओर इशारा कर रहा है।
तीन केंद्रों पर हुई बड़ी गड़बड़ी
जांच की आंच जिले के तीन प्रमुख संग्रहण केंद्रों सक्ती, डभरा और बोड़ासागर तक पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों केंद्रों पर कुल 1,70,743 मैट्रिक टन धान का भंडारण किया गया था। नियमानुसार जब मिलिंग के लिए धान का उठाव शुरू हुआ, तब भौतिक सत्यापन में पाया गया कि भंडार गृहों में उतना धान है ही नहीं जितना कागजों पर दर्ज था। इस गड़बड़ी ने विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सिस्टम की सुस्ती या बिचौलियों का खेल?
इस पूरे मामले में अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या धान की यह चोरी केवल निचले कर्मचारियों की लापरवाही है या फिर बिचौलियों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इस हेराफेरी को अंजाम दिया गया है। जानकारों का कहना है कि धान की इतनी बड़ी मात्रा का गायब होना बिना विभागीय संरक्षण के संभव नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि खुले में रखे धान के खराब होने का बहाना बनाकर या फर्जी उठाव दिखाकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है।
21 करोड़ का नुकसान और आगे की कार्रवाई
इस घोटाले से राज्य सरकार को सीधे तौर पर 21 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने का अनुमान है। प्रशासन ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की गति तेज कर दी है। धान की कमी पाए जाने के बाद संबंधित केंद्रों के प्रभारी और जिम्मेदार कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जांच टीम अब रिकॉर्ड्स की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धान कब और किन परिस्थितियों में गायब हुआ।
सख्त कार्रवाई के संकेत, रडार पर कई बड़े नाम
प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि इस मामले में जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है। सक्ती के डीएमओ और अन्य पर्यवेक्षण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अगर जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ उनकी संपत्तियों से वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। फिलहाल, इस खुलासे के बाद अन्य जिलों के संग्रहण केंद्रों में भी खलबली मच गई है।



