पशुधन विकास विभाग में करोड़ों का भ्रष्टाचार, आरोपी बाबू सस्पेंड, ऐसे गायब हुई करोड़ों की रकम

अंबिकापुर: सरगुजा जिले के पशुधन विकास विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों और विभागीय समितियों के करोड़ों रुपयों के गबन का खुलासा हुआ है। विभाग के एक सहायक कर्मचारी ने मिलकर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने आरोपी बाबू को निलंबित कर दिया है और अब पूरे प्रकरण की जांच पुलिस के हवाले कर दी गई है।

दो अलग-अलग खातों से गायब हुई करोड़ों की रकम

जांच में पता चला है कि घोटाले को दो हिस्सों में अंजाम दिया गया। पहले मामले में हितग्राहियों के अंशदान की 44 लाख 54 हजार 700 रुपये की राशि उप संचालक के आधिकारिक बैंक खाते में जमा ही नहीं की गई। वहीं दूसरे मामले में पशु रोगी कल्याण समिति के खाते में आने वाले 63 लाख 29 हजार 640 रुपये का भी अता-पता नहीं चला। इन दोनों रकमों को मिलाकर कुल घोटाला एक करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है।

आरोपी बाबू ने जांच में नहीं किया सहयोग

घोटाले की सुगबुगाहट होने के बाद विभाग के सहायक ग्रेड-02 प्रदीप कुमार अंबष्ट को मुख्य आरोपी माना गया। प्रशासन ने उन्हें 13 जुलाई 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने 5 सदस्यों की एक विशेष जांच टीम बनाई। इस टीम ने अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें साफ कहा गया कि आरोपी कर्मचारी ने जांच के दौरान कोई भी जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए।

लेटरहेड का निजी इस्तेमाल और सरकारी नियमों की धज्जियां

जांच के दौरान एक और गंभीर खुलासा हुआ। प्रदीप कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 14 अगस्त 2025 को पशु चिकित्सा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का उपयोग अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए किया। सरकारी नियमों के अनुसार यह एक बड़ा अपराध है। नोटिस मिलने के बाद भी संतोषजनक जवाब न मिलने और धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिलने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

तत्काल प्रभाव से निलंबन और मुख्यालय में बदलाव

ठोस सबूतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रदीप कुमार अंबष्ट को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मैनपाट के पशु चिकित्सालय में तय किया गया है। विभाग की इस कार्रवाई से कार्यालय के अन्य कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

पुलिस की गिरफ्त में होगा घोटालेबाज: मुख्य बिंदु

इस पूरे भ्रष्टाचार की कड़ियां सुलझाने के लिए अब पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। विभाग के उप संचालक ने संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस अब उन रास्तों की तलाश कर रही है जहां से सरकारी पैसा गायब किया गया।

  • घोटाले की कुल राशि: 1 करोड़ रुपये से अधिक
  • आरोपी कर्मचारी: प्रदीप कुमार अंबष्ट (सहायक ग्रेड-02)
  • विभागीय कार्रवाई: पद से निलंबन और एफआईआर
  • पुलिस जांच: बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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