छत्तीसगढ़ में गरीबों के लिए बने आशियाने पर ‘अमीरों’ का कब्जा: फाइव स्टार होटल ने थोक में खरीदे हाउसिंग बोर्ड के 128 सरकारी फ्लैट्स

रायपुर: छत्तीसगढ़ में गरीबों को छत देने के लिए बनाई गई सरकारी योजना अब बड़े कारोबारियों के काम आ रही है। नवा रायपुर के सेक्टर-16 में कम आय वर्ग (LIG) के लिए बने 128 फ्लैट्स को एक फाइव स्टार होटल समूह ‘मेफेयर’ ने खरीद लिया है। जिस प्रोजेक्ट को झुग्गियों या किराए के मकानों में रहने वाले जरूरतमंदों के लिए तैयार किया गया था, उसे अब हाउसिंग बोर्ड ने करीब 16 करोड़ रुपये में एक निजी ग्रुप के हवाले कर दिया है।

हाउसिंग बोर्ड का बड़ा फैसला: बल्क में बेचे जा रहे सस्ते मकान

छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने नवा रायपुर के ब्लॉक नंबर 36 और 38 के सभी फ्लैट्स को एक साथ बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। एक फ्लैट की कीमत लगभग 12.66 लाख रुपये तय की गई थी। नियम के मुताबिक, ये घर उन लोगों को मिलने चाहिए थे जिनके पास अपना सिर छिपाने की जगह नहीं है और जिनकी आय कम है। लेकिन बोर्ड ने अब थोक में संपत्तियां बेचकर बड़े कारोबारियों के लिए एंट्री आसान कर दी है।

क्यों आई थोक में मकान बेचने की नौबत?

इस पूरे सौदे पर जब सवाल उठे, तो छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव का कहना है कि ये फ्लैट्स लंबे समय से खाली पड़े थे। उन्होंने बताया कि इन्हें बेचने के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया। इसके बाद बोर्ड ने नियमों में बदलाव किया ताकि फंसी हुई संपत्ति को बेचकर नए प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाया जा सके। इसी संशोधन के बाद मेफेयर ग्रुप ने इन फ्लैट्स को कर्मचारियों के निवास या अन्य उपयोग के लिए खरीदा है।

आंकड़ों की जुबानी: करोड़ों की संपत्ति और सरकारी सब्सिडी

हाउसिंग बोर्ड की बैलेंस शीट देखें तो पिछले साल बोर्ड ने 1022 करोड़ रुपये की कुल 4689 संपत्तियां बेची हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 70 फीसदी घर गरीबों और निम्न आय वर्ग के लिए ही बनाए गए थे। इन मकानों पर सरकार करोड़ों रुपये की ब्याज सब्सिडी भी देती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर सरकारी छूट का फायदा उठाकर बने घर बड़े कॉर्पोरेट घराने खरीद लेंगे, तो योजना का असली मकसद कैसे पूरा होगा?

भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए बदली रणनीति

पुराने मकानों के न बिकने से सबक लेते हुए हाउसिंग बोर्ड ने अपनी भविष्य की कार्ययोजना बदल दी है। अब किसी भी नए प्रोजेक्ट पर काम तभी शुरू होगा, जब कम से कम 60 फीसदी घरों की एडवांस बुकिंग हो जाएगी। बोर्ड का मानना है कि इससे सरकारी पैसा ब्लॉक नहीं होगा और केवल वही प्रोजेक्ट लॉन्च किए जाएंगे जिनकी बाजार में असल मांग है।

गरीबों का सपना अब भी अधूरा

सरकार भले ही संपत्तियां बिकने को अपनी उपलब्धि मान रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। नवा रायपुर में अब भी करीब 400 फ्लैट्स खाली हैं और सेक्टर-34 की संपत्तियों को भी थोक में बेचने की तैयारी चल रही है। एक तरफ गरीब आज भी किराए के कमरों या कच्ची बस्तियों में रहने को मजबूर हैं, वहीं उनके लिए बने आधुनिक प्रीकास्ट फ्लैट्स अब रईस घरानों और कॉर्पोरेट ग्रुप्स की संपत्ति बनते जा रहे हैं।

इस मामले के मुख्य बिंदु:

  • खरीदार: मेफेयर होटल ग्रुप
  • कुल फ्लैट्स: 128 (LIG श्रेणी)
  • कुल सौदा: लगभग 16 करोड़ रुपये
  • लोकेशन: नवा रायपुर, सेक्टर-16

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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