गरियाबंद के जंगलों में नक्सलियों का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त: जमीन के नीचे दबा मिला 46 लाख कैश और हथियारों का जखीरा

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस की संयुक्त टीम ने मैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ेगोबरा के पास सांपसाटी की पहाड़ियों और घने जंगलों में दबिश देकर नक्सलियों के गुप्त ठिकाने (डंप) का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस के हाथ 46 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी के साथ भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, विस्फोटक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हैं। गरियाबंद जिला पुलिस की ई-30 टीम और धमतरी डीआरजी की इस साझा कार्रवाई ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।

सरेंडर कर चुके नक्सलियों के सुराग पर मिली सफलता

इस पूरे ऑपरेशन की नींव उन नक्सलियों ने रखी जिन्होंने हाल ही में सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया था। पूछताछ के दौरान सरेंडर कर चुके माओवादियों ने खुलासा किया था कि सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेताओं ने धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन के लिए जंगलों में भारी मात्रा में रसद और हथियार छिपाकर रखे हैं। 28 फरवरी को जब सुरक्षाबल बताए गए स्थान पर पहुंचे, तो वहां जमीन के भीतर और झाड़ियों में छिपाकर रखा गया सामान बरामद हुआ। जब्त सामग्री में 46 लाख 31 हजार 500 रुपये नकद, एक भरमार बंदूक, सुरका राइफल, 32 बीजीएल सेल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, डेटोनेटर, एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन शामिल हैं।

इलाके में सर्चिंग तेज, सुरक्षाबलों की बड़ी रणनीतिक जीत

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और विस्फोटक का मिलना यह दर्शाता है कि नक्सली इस क्षेत्र में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे। बरामद किए गए सामानों में एके-47, इंसास और एसएलआर जैसे घातक हथियारों के राउंड्स भी मिले हैं, जो सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चिंता का विषय थे। इस सफलता के बाद आसपास के जंगली इलाकों में तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी रकम नक्सलियों के पास कहां से आई और इसका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाना था।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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