
छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में इस समय होली की खुमार छाई हुई है, लेकिन इसी बीच खगोलीय घटनाक्रम ने त्योहार के समीकरण बदल दिए हैं। कल, यानी 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस ग्रहण के कारण ही होलिका दहन और रंगों वाली होली के बीच के अंतराल को लेकर लोगों में काफी असमंजस रहा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा, जिसका असर सभी राशियों पर देखने को मिलेगा।
पूर्ण चंद्र ग्रहण का समय और मुख्य चरण
कल होने वाला यह ग्रहण एक ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ होगा, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया (प्रच्छाया) से ढक जाएगा। भारतीय समय के अनुसार यह खगोलीय घटना दोपहर से शुरू होकर शाम तक चलेगी। नीचे दी गई तालिका में ग्रहण के विभिन्न चरणों का सटीक समय दिया गया है:
चंद्र ग्रहण 2026: समय सारिणी
| घटना का चरण | भारतीय समय (IST) |
| ग्रहण का प्रारंभ (आंशिक) | दोपहर 03:20 बजे |
| पूर्णता का प्रारंभ (Totality Starts) | शाम 04:34 बजे |
| पूर्णता की समाप्ति (Totality Ends) | शाम 05:33 बजे |
| ग्रहण की समाप्ति | शाम 06:48 बजे |
| कुल अवधि | 3 घंटे 27 मिनट |
क्या भारत में दिखाई देगा यह नजारा?
खगोल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि साल 2026 का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में जब चंद्रमा उदय होगा, तब तक ग्रहण अपने अंतिम चरणों में होगा। उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में लोग ग्रहण के पूर्ण चरण का अंत भी देख पाएंगे। भारत के अलावा यह अद्भुत दृश्य पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी नजर आएगा।
सूतक काल और धार्मिक पाबंदियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है। चूंकि ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू हो रहा है, इसलिए सूतक काल कल सुबह 6:20 बजे से ही लग जाएगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। ग्रहण समाप्त होते ही शाम 6:48 बजे सूतक काल भी खत्म हो जाएगा, जिसके बाद शुद्धिकरण और दान-पुण्य का विधान है।
होली के त्योहार पर ग्रहण का असर
इस बार ग्रहण की वजह से ही तिथियों में बड़ा फेरबदल हुआ है। होलिका दहन आज यानी 2 मार्च की मध्यरात्रि को किया जा रहा है, ताकि सूतक काल और ग्रहण की छाया से बचा जा सके। वहीं, रंगों वाली होली कल के बजाय 4 मार्च को खेली जाएगी। जानकारों का कहना है कि ग्रहण काल के दौरान भोजन बनाने और खाने से बचना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है ताकि खगोलीय विकिरण का असर उन पर न पड़े।
खगोलीय और ज्योतिषीय महत्व
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक सामान्य खगोलीय घटना है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद संवेदनशील माना गया है। सिंह राशि में लग रहे इस ग्रहण के कारण मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद स्नान करके सामर्थ्य अनुसार सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी या दूध का दान करना शुभ माना जाता है।



