
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) ने उद्योग विभाग में ‘निरीक्षक वाष्पयंत्र’ (बॉयलर इंस्पेक्टर) के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर चयन प्रक्रिया पर लग रहे सभी आरोपों को निराधार और भ्रामक करार दिया है। पीएससी का कहना है कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित मापदंडों और कानूनी नियमों के तहत संपन्न की गई है, जिसमें किसी भी स्तर पर पक्षपात नहीं हुआ है। इस स्पष्टीकरण के बाद भर्ती को लेकर चल रही सियासी और प्रशासनिक खींचतान में नया मोड़ आ गया है।
नियमों के दायरे में हुआ आयु सीमा का निर्धारण
भर्ती में सबसे बड़ा विवाद अभ्यर्थी की अधिकतम आयु सीमा को लेकर उठा था। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए आयोग ने 3 मार्च 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान प्रचलित सरकारी नियमों के आधार पर ही पात्रता तय की गई थी। आयोग के अनुसार, आयु सीमा में मिलने वाली छूट और पात्रता का निर्धारण पूरी तरह विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप था। पीएससी ने जोर देकर कहा कि चयन की कार्यवाही में किसी भी अपात्र व्यक्ति को लाभ नहीं पहुंचाया गया है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष रही है।
सदस्यों पर लगे ‘रिश्तेदारी’ के आरोपों का खंडन
विवाद का एक अन्य पहलू आयोग के सदस्यों और चयनित अभ्यर्थी के बीच कथित संबंधों को लेकर था। पीएससी ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि प्रथम स्थान पर चयनित अभ्यर्थी आयोग के किसी भी सदस्य के रिश्तेदार नहीं हैं। आयोग ने सदस्यों के नाम के साथ भ्रामक जानकारी फैलाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के आरोप चयन प्रक्रिया की गरिमा को धूमिल करने का प्रयास हैं। आयोग ने साफ किया कि सदस्यों की भूमिका केवल नीतिगत और प्रक्रियात्मक रही है, जिसका व्यक्तिगत हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा नेता की शिकायत और भ्रष्टाचार के आरोप
आपको बता दें कि यह मामला तब गरमाया जब भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल से इसकी लिखित शिकायत की थी। श्रीवास ने चयनित अभ्यर्थी कानन वर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वे निर्धारित आयु सीमा को पार कर चुके थे। उन्होंने आयोग के तीन सदस्यों—प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान और सरिता उइके की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बताते हुए उन्हें पद से हटाने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। विपक्षी खेमे ने इसे सत्ता और रसूख के दुरुपयोग का उदाहरण बताया था।
उच्च न्यायालय के आदेशानुसार होगी आगामी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह विवाद कानूनी दहलीज तक पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने अपने बयान में अंत में उल्लेख किया है कि इस प्रकरण से संबंधित जो भी वाद उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं, उनके आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। आयोग ने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, आयोग के इस कड़े रुख ने चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वालों को सीधा जवाब दे दिया है।



