
मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे तौर पर आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर दिखने लगा है। युद्ध की आहट और असुरक्षित एयरस्पेस के कारण खाड़ी देशों से होने वाली विमान सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसी वैश्विक संकट की चपेट में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कोटा के तीन युवक भी आ गए हैं। पर्यटन के लिए दुबई गए ये युवक पिछले कई दिनों से अपनी सुरक्षित वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन लगातार रद्द होती फ्लाइट्स ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
बिलासपुर के कोटा निवासी तीन दोस्त दुबई में फंसे
कोटा निवासी शिवम मिश्रा अपने दो साथियों, आकाश और आयुष के साथ कुछ दिन पहले सैर-सपाटे के लिए दुबई गए थे। उनकी यात्रा सुखद रही, लेकिन वापसी के समय युद्ध के बिगड़ते हालातों ने उनकी योजनाओं पर पानी फेर दिया। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट डायवर्ट होने और सुरक्षा कारणों से विमानों के परिचालन में आई बाधा के चलते ये तीनों युवक वर्तमान में दुबई के एक होटल में रुकने को मजबूर हैं। इनके परिजनों ने भारत सरकार और प्रशासन से उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
दो बार रद्द हुई फ्लाइट, 5 मार्च की उड़ान पर टिकी उम्मीदें
शिवम और उनके दोस्तों की घर वापसी की राह में तकनीकी और सुरक्षा कारणों से बार-बार रोड़े अटक रहे हैं। उनकी पहली वापसी की टिकट 28 फरवरी की थी, जिसे एयरलाइन ने अचानक रद्द कर दिया। इसके बाद उन्होंने बड़ी मुश्किल से 3 मार्च की नई टिकट बुक कराई, लेकिन युद्ध के बढ़ते तनाव के कारण वह फ्लाइट भी निरस्त कर दी गई। अब उन्हें 5 मार्च की उड़ान का टिकट मिला है। इन युवकों को उम्मीद है कि इस बार हालात सामान्य रहेंगे और वे अपने वतन लौट सकेंगे।
दुबई में जमीनी हालात सामान्य, सुरक्षा को लेकर डर नहीं
शिवम मिश्रा ने दुबई से फोन पर बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि वहां के स्थानीय हालात भारत में दिखाई जा रही खबरों जैसे डरावने नहीं हैं। उन्होंने बताया कि दुबई शहर में जनजीवन पूरी तरह सामान्य है, मॉल और पर्यटन स्थल खुले हुए हैं और स्थानीय प्रशासन ने किसी भी तरह की खतरे की चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने से उनके मन में अनिश्चितता का भाव जरूर है, लेकिन व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर उन्हें वहां कोई बड़ा खतरा महसूस नहीं हो रहा है।
बार-बार फ्लाइट कैंसिल होने से बढ़ा मानसिक और आर्थिक बोझ
भले ही दुबई में सुरक्षा का संकट न हो, लेकिन बार-बार यात्रा टलने से इन युवकों पर मानसिक दबाव बढ़ गया है। शिवम ने बताया कि होटल में रुकने की अवधि बढ़ने के कारण उनका बजट भी गड़बड़ा गया है और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है। हर बार जब फ्लाइट रद्द होती है, तो उन्हें नए सिरे से बुकिंग और सूचनाओं के लिए घंटों एयरपोर्ट और एयरलाइंस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे वे काफी थकावट और तनाव महसूस कर रहे हैं।
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की भारी भीड़
ईरान-इजरायल तनाव के कारण दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Dubai International Airport) पर इन दिनों असामान्य स्थिति बनी हुई है। दुनिया भर के यात्री वहां फंसे हुए हैं क्योंकि कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं या उड़ानों को री-शेड्यूल किया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कुछ संवेदनशील एयर कॉरिडोर को बंद कर दिया गया है, जिससे उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की समस्या आम हो गई है। शिवम और उनके दोस्तों को भी एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और भीड़ का सामना करना पड़ रहा है।
कोटा में परिजन चिंतित, वीडियो कॉल से रख रहे हैं नजर
छत्तीसगढ़ के कोटा में मौजूद इन युवकों के परिवार वाले गहरी चिंता में हैं। माता-पिता और रिश्तेदार लगातार वीडियो कॉल के जरिए बच्चों से संपर्क बनाए हुए हैं और उनकी कुशलता पूछ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि वे हर पल समाचारों पर नजर रखे हुए हैं। हालांकि बच्चों के सुरक्षित होने की खबर से उन्हें थोड़ी राहत है, लेकिन जब तक वे घर नहीं पहुंच जाते, तब तक परिवार का तनाव कम नहीं होगा। वे लगातार ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि 5 मार्च की फ्लाइट सुरक्षित उड़ान भरे।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और एयर रूट्स पर पड़ता व्यापक प्रभाव
मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जब भी अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका सबसे पहला असर ‘विमानन गलियारों’ पर पड़ता है। सुरक्षा एजेंसियां युद्धग्रस्त क्षेत्रों के ऊपर से विमान ले जाने की अनुमति नहीं देतीं, जिससे लंबे वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करना पड़ता है। इससे ईंधन की खपत बढ़ती है और कई बार उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं। कोटा के इन युवकों का मामला इसी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का एक छोटा सा हिस्सा है, जो बताता है कि सीमाओं पर होने वाली जंग कैसे हजारों किलोमीटर दूर बैठे परिवारों को प्रभावित करती है।



