फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई: राजनांदगांव में सहायक शिक्षक की सेवा समाप्त

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में शिक्षा विभाग ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाया है। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने के मामले में विभाग ने एक सहायक शिक्षक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) प्रवास सिंह बघेल ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता और शुचिता से समझौता नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई प्रदेश भर में चल रहे फर्जी दिव्यांगता मामलों की जांच की कड़ी में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।

डोंगरगांव के घोरदा स्कूल में पदस्थ थे आरोपी शिक्षक

बर्खास्त किए गए सहायक शिक्षक विकास लाटा डोंगरगांव विकासखंड के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला, घोरदा में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दौरान लाभ प्राप्त करने के लिए फर्जी तरीके से दिव्यांगता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। दिव्यांग संघ और अन्य स्रोतों से मिली शिकायतों के बाद विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उनके विरुद्ध विधिवत विभागीय जांच (Departmental Enquiry) संस्थित की गई।

मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होने से बचते रहे शिक्षक

जांच के दौरान विभाग ने विकास लाटा को अपनी दिव्यांगता की सत्यता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए। उन्हें जिला चिकित्सालय दुर्ग में गठित मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर चिकित्सीय परीक्षण (Medical Test) कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। हालांकि, बार-बार आदेश जारी होने के बावजूद वे मेडिकल बोर्ड के सामने हाजिर नहीं हुए। उनकी यह अनुपस्थिति उनके द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र की संदिग्धता को पुख्ता करने का मुख्य आधार बनी।

विभागीय जांच में तीन बार अनुपस्थित रहने पर एकतरफा कार्रवाई

जांच अधिकारी ने निष्पक्षता बरतते हुए सहायक शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने के लिए तीन बार मौका दिया। विकास लाटा को निर्धारित तिथियों पर उपस्थित होने के लिए सम्मन जारी किए गए थे, लेकिन वे एक बार भी जांच टीम के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। अंततः, जांच अधिकारी को उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी पड़ी, जिसमें उनके खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि हुई और प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया गया।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत बर्खास्तगी का आदेश

जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की। विकास लाटा को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत दोषी पाते हुए उन्हें शासकीय सेवा से पृथक (Dismiss) कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त की गई नियुक्ति अवैध है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

दिव्यांग संघ की मुहिम और फर्जीवाड़े पर प्रशासन की नजर

प्रदेश में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वालों के खिलाफ दिव्यांग संघ लंबे समय से मुहिम चला रहा है। संघ का आरोप है कि सैकड़ों अपात्र लोग पात्र दिव्यांगों का हक मार रहे हैं। राजनांदगांव की यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर पेश करती है। प्रशासन अब उन अन्य कर्मचारियों की सूची भी खंगाल रहा है जिनके प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं, ताकि वास्तविक दिव्यांगों को उनका हक मिल सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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