
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बोर्ड परीक्षा के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। परीक्षा केंद्र की शुचिता बनाए रखने के लिए तैनात उड़नदस्ता टीम उस समय हैरान रह गई जब एक हाईस्कूल के प्रिंसिपल बिना किसी आधिकारिक ड्यूटी के परीक्षा हॉल में घूमते पाए गए। जांच में पता चला कि उसी केंद्र में प्रिंसिपल साहब की बहू 12वीं बोर्ड की परीक्षा दे रही थी। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच तेज कर दी है।
पिपरिया स्कूल के प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप
यह पूरा मामला कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पिपरिया का है। यहाँ के प्राचार्य ललित कुमार चंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा केंद्र की मर्यादा का उल्लंघन किया। उड़नदस्ता टीम ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि प्राचार्य महोदय अपनी बहू को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से बार-बार परीक्षा कक्षों के चक्कर काट रहे थे, जबकि उस दौरान उनकी कोई भी आधिकारिक ड्यूटी वहां नहीं लगाई गई थी।

उड़नदस्ता टीम की हिदायत को किया अनसुना
निरीक्षण दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 27 फरवरी 2026 को जीव विज्ञान (Biology) की परीक्षा के दौरान पहली बार प्रिंसिपल ललित कुमार चंद्रा को संदिग्ध अवस्था में कमरों में घूमते देखा गया। उस समय टीम ने उन्हें समझाइश दी थी कि बिना ड्यूटी के केंद्र में प्रवेश वर्जित है और उन्हें विद्यालय परिसर से बाहर रहने की हिदायत दी गई थी। हालांकि, नियमों को ताक पर रखकर प्राचार्य ने प्रशासन की चेतावनी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
गणित की परीक्षा में दोबारा पकड़े गए प्राचार्य
प्राचार्य की मनमानी यहीं नहीं रुकी; 2 मार्च 2026 को जब 12वीं कक्षा के गणित (Maths) विषय की परीक्षा चल रही थी, तब उड़नदस्ता टीम ने दोबारा आकस्मिक निरीक्षण किया। टीम यह देखकर दंग रह गई कि मना करने के बावजूद प्रिंसिपल चंद्रा फिर से परीक्षा कक्षों के भीतर मौजूद थे। बार-बार की यह उपस्थिति केवल संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति लग रही थी, क्योंकि गणित जैसे कठिन विषय में परीक्षार्थियों को अक्सर बाहरी मदद की आवश्यकता महसूस होती है।
ससुर-बहू का रिश्ता और संदिग्ध उपस्थिति
जब उड़नदस्ता टीम ने गहनता से पड़ताल की, तो मामले की असली जड़ सामने आई। पता चला कि उसी परीक्षा केंद्र में प्राचार्य ललित कुमार चंद्रा की सगी बहू 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हो रही थी। नियमों के मुताबिक, यदि किसी शिक्षक या अधिकारी का नजदीकी रिश्तेदार उसी केंद्र में परीक्षा दे रहा हो, तो संबंधित कर्मचारी को उस केंद्र से दूर रहना अनिवार्य है। प्राचार्य द्वारा इस नियम की जानबूझकर की गई अनदेखी ने उनकी मंशा को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है।
बीईओ ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी रिपोर्ट
इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मामले की विस्तृत लिखित रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कोरबा को भेज दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि केंद्राध्यक्ष और उड़नदस्ता टीम के बार-बार टोकने के बावजूद प्राचार्य का व्यवहार असहयोगपूर्ण और अड़ियल रहा। इसे शासकीय कार्य में बाधा, लापरवाही और गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नकल गिरोह की आशंका
इस घटना के उजागर होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के परीक्षा केंद्रों में होने वाली धांधली पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही अपने परिजनों को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों को तोड़ेंगे, तो मेधावी छात्रों के साथ न्याय कैसे होगा? इस मामले ने उन चर्चाओं को बल दिया है जिनमें कहा जाता है कि सुदूर अंचलों में रसूखदार लोग साठगांठ कर नकल को बढ़ावा देते हैं।
विभागीय कार्रवाई और भविष्य का फैसला
अब गेंद जिला शिक्षा अधिकारी के पाले में है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्राचार्य ललित कुमार चंद्रा के खिलाफ कड़ी विभागीय जांच शुरू की जा सकती है, जिसमें उन्हें निलंबन (Suspension) का सामना भी करना पड़ सकता है। बोर्ड परीक्षाओं की साख बचाने के लिए प्रशासन इस मामले में नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की तैयारी में है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में विभाग इस ‘ससुर-बहू’ वाले हाई-प्रोफाइल मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।



