मखाना हब बनेगा धमतरी: नगरी क्षेत्र वनांचल की जलवायु और सरकारी प्रयास बदलेंगे किसानों की तकदीर

Makhana Production in Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले को प्रदेश का मखाना हब बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर राज्य सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। विशेष रूप से नगरी वनांचल क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और जल निकायों की उपलब्धता को देखते हुए इसे मखाना उत्पादन के लिए आदर्श माना जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और लघु सीमांत किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि करना भी है। धमतरी की छोटी-छोटी डबरियों और तालाबों को अब समृद्धि के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे जिले की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

केंद्रीय कृषि मंत्री की घोषणा: मखाना बोर्ड में शामिल होगा धमतरी

धमतरी को मखाना उत्पादन के राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने की नींव केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने प्रवास के दौरान रखी थी। उन्होंने जिले की संभावनाओं को देखते हुए धमतरी को मखाना बोर्ड में शामिल करने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है। मखाना बोर्ड में शामिल होने से स्थानीय किसानों को उन्नत तकनीक, शोध और बेहतर बाजार लिंकेज का सीधा लाभ मिल सकेगा।

न्यूनतम खर्च और अधिकतम लाभ: नकदी फसल की विशेषताएं

मखाना (Euryale ferox) एक ऐसी जलीय फसल है जो स्थिर जल निकायों जैसे तालाबों, डबरियों और आर्द्रभूमि में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें खेती की लागत अन्य फसलों की तुलना में काफी कम आती है। पिछले फसल से बचे हुए बीजों से ही नए पौधे अंकुरित हो जाते हैं, जिससे बीज पर होने वाला खर्च बच जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण वैश्विक बाजार में इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है, जिससे यह किसानों के लिए एक बेहतरीन नकदी फसल साबित हो रही है।

100 एकड़ का लक्ष्य: स्व-सहायता समूहों के जरिए आजीविका संवर्धन

जिला प्रशासन ने प्रथम चरण में आजीविका संवर्धन के लिए 100 एकड़ भूमि को मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित किया है। इस परियोजना की बागडोर मुख्य रूप से महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के हाथों में सौंपी गई है। प्रारंभिक चरण में नगरी के संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में खेती की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो चुकी हैं। महिलाओं को इस नवाचार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

नगरी वनांचल की अनुकूल जलवायु: विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धमतरी के नगरी क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण और वहां की पर्याप्त जल उपलब्धता मखाना की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। यहाँ की मिट्टी और पानी का तापमान मखाना के बीजों के अंकुरण और प्रसार के लिए श्रेष्ठ पाया गया है। वनांचल क्षेत्रों में परंपरागत खेती के साथ-साथ मखाना जैसे मूल्यवान उत्पाद को जोड़कर कृषि विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए स्थानीय अवसर सृजित होंगे।

कलेक्टर की सक्रियता: संकरा क्षेत्र का जमीनी निरीक्षण

धमतरी कलेक्टर ने स्वयं इस परियोजना में गहरी रुचि दिखाते हुए बीते दिनों संकरा क्षेत्र का दौरा किया और मखाना खेती की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और सुचारू विपणन (Marketing) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर का विजन धमतरी को प्रदेश में मखाना उत्पादन का एक सक्सेस मॉडल बनाना है, जिसका अनुसरण अन्य जिले भी कर सकें।

आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह: भविष्य की कार्ययोजना

मखाना उत्पादन की इस पहल से नगरी क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं। जिला प्रशासन ने कृषि और उद्यानिकी विभाग को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जल प्रबंधन और फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा सके। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से मखाना खेती के रकबे का विस्तार किया जाएगा और अधिक से अधिक समूहों को इस लाभप्रद व्यवसाय से जोड़ा जाएगा। इससे न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि वनांचल की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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