
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट योजना की भव्य शुरुआत कर दी है। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से राज्य सरकार महिलाओं को न केवल व्यापार करने का अवसर दे रही है, बल्कि उन्हें समाज में ‘उद्यमी’ के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य भी रखा है। इस योजना के तहत अब छत्तीसगढ़ के शहरों और गांवों में कोदो-कुटकी और रागी जैसे पौष्टिक मिलेट्स (मोटा अनाज) के व्यंजनों की खुशबू महकेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पांच जिलों की महिलाओं को ये कार्ट सौंपकर इस योजना का विधिवत श्रीगणेश किया।
एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता: कारोबार शुरू करना हुआ आसान
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत पात्र महिला हितग्राहियों को अपना स्वयं का ‘मिलेट कार्ट’ सेटअप करने के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। यह राशि सक्षम योजना के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिसका उपयोग महिलाएं आधुनिक कार्ट खरीदने, जरूरी बर्तन और कच्चा माल जुटाने के लिए कर सकेंगी। आर्थिक बाधाओं के कारण जो महिलाएं अपना छोटा व्यवसाय शुरू नहीं कर पाती थीं, उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।
प्रधानमंत्री के मिलेट विजन को मिला छत्तीसगढ़ का साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर मिलेट्स को ‘श्री अन्न’ के रूप में पहचान दिलाने और इसे बढ़ावा देने का जो आह्वान किया था, छत्तीसगढ़ सरकार उसे अब धरातल पर उतार रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में मिलेट्स को ‘सुपर फूड’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो राज्य के पारंपरिक मोटे अनाज को आधुनिक बाजारों और शहरी थालियों तक पहुँचाने का काम करेगी।
कृषि महाविद्यालय के साथ तकनीकी तालमेल और प्रशिक्षण
व्यापार को सफलतापूर्वक चलाने के लिए केवल पैसा ही नहीं, बल्कि कौशल भी जरूरी है। इसीलिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि महाविद्यालय और ‘साथी परियोजना’ के साथ हाथ मिलाया है। इसके तहत स्व-सहायता समूहों और युवा महिला उद्यमियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा इन महिलाओं को मिलेट प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और ग्राहकों से व्यवहार करने के गुर सिखाए जाएंगे, ताकि उनका व्यवसाय प्रतिस्पर्धी बाजार में टिक सके।
400 ठिकानों पर सजेगा मिलेट कैफे: कॉलेज और ऑफिस होंगे केंद्र
राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 400 मिलेट कार्ट और कैफे खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना की रणनीति के तहत ये कार्ट किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि उन जगहों पर लगाए जाएंगे जहाँ लोगों की आवाजाही अधिक हो। राज्य के प्रमुख कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों, पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक पार्कों में ये मिलेट कार्ट स्थापित किए जाएंगे। इससे सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और पर्यटकों को स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता मिलेगा और महिलाओं की बिक्री में भी इजाफा होगा।
रागी का चीला और कोदो की बिरयानी: मेन्यू में होंगे आधुनिक व्यंजन
इस प्रशिक्षण की सबसे अच्छी बात यह है कि विशेषज्ञों द्वारा महिलाओं को पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ मिलेट्स के आधुनिक व्यंजन बनाना भी सिखाया जाएगा। मिलेट कार्ट पर रागी के चीले, कोदो की बिरयानी, मिलेट पास्ता, बिस्किट और अन्य स्वादिष्ट पकवान उपलब्ध होंगे। इस तरह का प्रशिक्षण महिलाओं को बड़ी खाद्य कंपनियों से मुकाबला करने की ताकत प्रदान करेगा और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की ब्रांडिंग को नई ऊंचाई मिलेगी।
कुपोषण के खिलाफ जंग और सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था
छत्तीसगढ़ में मिलेट्स को केवल फसल नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ एक हथियार के रूप में देखा जा रहा है। जब महिलाओं के हाथों में इन पोषक अनाजों की कमान आएगी, तो समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही, कोदो-कुटकी की मांग बढ़ने से गांवों के किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। आने वाले समय में ये ‘मिलेट कार्ट’ छत्तीसगढ़ की सड़कों पर एक नई आर्थिक और सामाजिक क्रांति के प्रतीक बनेंगे।



