बलरामपुर में अफीम की खेती का ‘गढ़’ बना सीमावर्ती इलाका: खेतों में लहलहाती मिली नशीली फसल, पुलिस ने घेरा पूरा गांव

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती का नेटवर्क तेजी से फैलता नजर आ रहा है। जिले में लगातार दूसरे दिन अफीम की लहलहाती फसल मिलने से पुलिस महकमे और स्थानीय प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। ताजा मामला करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव का है, जहां गुप्त सूचना के आधार पर पहुंची पुलिस टीम दंग रह गई। यहां खेतों में बड़े पैमाने पर अफीम उगाई जा रही थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और नशीली फसलों की सुरक्षा के लिए मौके पर ही अस्थायी कैंप बना लिया है।

पुलिस का पहरा: रातभर खेत में तैनात रही टीम, साक्ष्य बचाने की कवायद

जैसे ही चंदाडांडी गांव में अफीम की खेती की खबर पुख्ता हुई, पुलिस की एक भारी-भरकम टीम ने मौके पर धावा बोल दिया। अधिकारियों को अंदेशा था कि रात के अंधेरे में आरोपी फसल को नष्ट कर सबूत मिटाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए पुलिस ने खेत के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया है। जवानों ने वहीं डेरा डाल दिया है ताकि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक एक भी पौधा वहां से हटाया न जा सके। पुलिस अब यह सुनिश्चित कर रही है कि जब तक पंचनामा और विधिक कार्रवाई पूरी न हो, फसल को कोई हाथ न लगाए।

झारखंड बॉर्डर पर सर्चिंग तेज: सीमावर्ती गांवों में पुलिस की दबिश

चंदाडांडी गांव भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील स्थान पर स्थित है, क्योंकि इसकी सीमा पड़ोसी राज्य झारखंड से लगती है। पुलिस का मानना है कि इस अवैध धंधे के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हो सकते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र होने का फायदा उठाकर आरोपी आसानी से फरार हो जाते हैं। इसे देखते हुए बलरामपुर पुलिस ने झारखंड बॉर्डर पर नाकेबंदी कर दी है और आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों में घर-घर सर्चिंग शुरू कर दी है। खुफिया विभाग को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके।

लगातार दूसरा मामला: त्रिपुरी के बाद अब चंदाडांडी में मिला नशे का सामान

बलरामपुर में नशीले पदार्थों की खेती का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। महज 24 घंटे पहले ही कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में पुलिस ने करीब तीन एकड़ जमीन पर की जा रही अफीम की खेती को पकड़ा था। दो दिनों के भीतर लगातार दो बड़े खुलासे होने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि जिले के सुदूर इलाकों में कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। प्रदेश का यह तीसरा मामला पुलिस अब इन दोनों मामलों के बीच के कनेक्शन को खंगाल रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट के ‘आका’ तक पहुंचा जा सके।

संगठित नेटवर्क का शक: कौन है इस अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड?

पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, अफीम की खेती कोई एक व्यक्ति अपने स्तर पर नहीं कर सकता, क्योंकि इसके लिए विशेष बीज और तकनीकी जानकारी की जरूरत होती है। संदेह जताया जा रहा है कि स्थानीय किसानों को पैसों का लालच देकर बाहर के तस्कर उनसे यह खेती करवा रहे हैं। पुलिस अब उन जमीनों के कागजात खंगाल रही है जिन पर यह फसल उगी है। भू-स्वामियों से पूछताछ की जा रही है कि उन्हें बीज कहां से मिले और तैयार माल की सप्लाई कहां होनी थी।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार: जांच के बाद होगा बड़ा खुलासा

हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी या बरामद माल की मात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। करोंधा पुलिस का कहना है कि वर्तमान में उनकी प्राथमिकता फसल को सुरक्षित रखना और संदेही व्यक्तियों को हिरासत में लेना है। एक बार पूरी फील्ड रिपोर्ट तैयार हो जाने के बाद, पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर से मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। स्थानीय लोगों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई ग्रामीण डर के मारे कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

ग्रामीणों से अपील: नशे के खिलाफ पुलिस का साथ देने की गुहार

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उनके आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध खेती या अनजान लोगों की आवाजाही दिखती है, तो तुरंत इसकी जानकारी नजदीकी थाने में दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। बलरामपुर पुलिस का उद्देश्य अब इस ‘ड्रग कॉरिडोर’ को पूरी तरह से नष्ट करना है ताकि युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में फंसने से बचाया जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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