
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अब सड़क पर बिना नंबर प्लेट की गाड़ी दौड़ाना महंगा पड़ेगा। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए एसएसपी रजनेश सिंह ने एक कड़ा आदेश जारी किया है। अब जिले के किसी भी पेट्रोल पंप पर उन दोपहिया या चार पहिया वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा, जिनकी नंबर प्लेट गायब है या नियमों के विरुद्ध है। पुलिस का मानना है कि अपराधी अक्सर बिना नंबर वाली गाड़ियों का इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने के लिए करते हैं, जिसे रोकने के लिए यह ‘सप्लाई बंद’ फॉर्मूला अपनाया गया है।
सुरक्षा के लिए कड़ा फैसला
एसएसपी रजनेश सिंह ने खाद्य विभाग, पेट्रोलियम कंपनियों के अफसरों और पंप संचालकों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। जिले में चोरी, लूट और झपटमारी जैसी घटनाओं में अक्सर ऐसी बाइक का इस्तेमाल होता है जिनकी पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट हटा दी जाती है। इस आदेश के बाद अब बिना नंबर की गाड़ी लेकर निकलने वालों को बीच सड़क पर ईंधन की किल्लत का सामना करना पड़ेगा, जिससे ऐसी गाड़ियों की आवाजाही पर लगाम लगेगी।
अमानक नंबर प्लेट पर भी रोक
पुलिस का यह आदेश सिर्फ ‘बिना नंबर’ वाली गाड़ियों तक सीमित नहीं है। यातायात डीएसपी के माध्यम से जारी निर्देशों में कहा गया है कि अगर किसी गाड़ी पर नंबर प्लेट तो है, लेकिन उस पर नंबर के बजाय कुछ और लिखा है या वह ट्रैफिक नियमों के विपरीत है, तो भी उसे तेल नहीं दिया जाएगा। अक्सर लोग नंबर प्लेट पर पद, जाति या फैंसी फोंट का इस्तेमाल करते हैं, जिसे अब यातायात नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
संदिग्धों की सूचना देना अनिवार्य
पेट्रोल पंप संचालकों को सिर्फ तेल देने से मना ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें पुलिस के ‘मुखबिर’ की भूमिका भी निभानी होगी। आदेश के मुताबिक, यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति बिना नंबर वाली गाड़ी लेकर पंप पर पहुंचता है, तो संचालक को तुरंत नजदीकी थाने या कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी देनी होगी। इससे पुलिस को शहर में घूम रहे संदिग्ध तत्वों को रंगे हाथ पकड़ने में मदद मिलेगी।
बीट पुलिसिंग और सघन चेकिंग
एसएसपी के निर्देश पर जिले भर में बीट स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। शहर के मुख्य चौराहों और एंट्री पॉइंट्स पर चेकिंग पोस्ट बनाए गए हैं, जहां आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस केवल जुर्माना नहीं वसूल रही, बल्कि यह भी तस्दीक कर रही है कि वाहन का इस्तेमाल किसी गैर-कानूनी काम के लिए तो नहीं हो रहा है।
जालसाजी करने वालों पर एफआईआर
पुलिस उन लोगों पर भी पैनी नजर रख रही है जो एक गाड़ी का नंबर दूसरी गाड़ी पर लगाकर घूम रहे हैं। चेकिंग के दौरान अगर किसी वाहन का मॉडल नंबर और आवंटित नंबर मेल नहीं खाता, तो उसे धोखाधड़ी मानकर मोटरयान अधिनियम के साथ-साथ आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। ऐसे मामलों को अब सीधे कोर्ट भेजा जा रहा है ताकि अपराधियों में कानून का खौफ बना रहे।
कंट्रोल रूम को सीधा अलर्ट
बिलासपुर पुलिस ने पंप संचालकों को पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर उपलब्ध कराया है। निर्देश है कि किसी भी विवाद या संदिग्ध स्थिति में कर्मचारी तुरंत फोन करें। पुलिस का तर्क है कि यदि अपराध होने से पहले ही वाहन की पहचान हो जाए, तो बड़ी वारदातों को आसानी से टाला जा सकता है।
सड़क हादसों पर लगेगी लगाम
अक्सर देखा गया है कि सड़क दुर्घटना के बाद बिना नंबर वाले वाहन चालक मौके से फरार हो जाते हैं। नंबर न होने के कारण पुलिस और पीड़ित के लिए वाहन की पहचान करना नामुमकिन हो जाता है। इस नए नियम से न सिर्फ अपराध कम होंगे, बल्कि हिट एंड रन के मामलों में भी कमी आएगी क्योंकि अब हर वाहन का रिकॉर्ड सड़क पर सक्रिय रहेगा।
नियम तोड़ने पर पंप पर भी एक्शन
एसएसपी ने साफ किया है कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर किसी पेट्रोल पंप पर बिना नंबर वाले वाहन को तेल देते हुए पाया गया, तो संबंधित संचालक के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस टीम सादे कपड़ों में पंपों की निगरानी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदेश का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है।



