
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सड़कों पर बहते खून और मासूम जिंदगियों के खत्म होने का मुद्दा काफी गरमाया रहा। अकलतरा सीट से कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने प्रदेश की सड़कों को ‘खूनी’ बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सदन में सवाल उठाया कि आखिर क्यों पुलिसिया कार्रवाई के दावों के बावजूद हादसों का ग्राफ नीचे नहीं आ रहा है? विधायक ने विशेष रूप से अकलतरा क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मौतें लगातार बढ़ रही हैं, जो एक बेहद चिंताजनक स्थिति है।
मौत का आंकड़ा: 2026 की शुरुआत में ही 13 लोगों ने गंवाई जान
विधायक राघवेंद्र सिंह ने सरकारी आंकड़ों की पोल खोलते हुए बताया कि अकलतरा क्षेत्र में साल 2024-25 के दौरान मौतों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी साल 2026 की शुरुआत ही हुई है और अब तक 13 लोग सड़क हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ और ओवरस्पीडिंग पर लगाम कसने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है, जिसकी कीमत आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है।
परिवहन मंत्री का जवाब: वाहनों की भीड़ और मानवीय चूक मुख्य कारण
विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य और परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने स्वीकार किया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कों पर वाहनों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी और यातायात नियमों के प्रति लोगों की लापरवाही इन हादसों की सबसे बड़ी वजह बन रही है। मंत्री ने कहा कि लोग हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं, जिससे छोटे हादसे भी जानलेवा साबित हो रहे हैं।
सरकार इस गंभीर मामले में जल्द स्थाई और प्रभावी समाधान निकाले: विधायक अजय
छत्तीसगढ़ विधानसभा में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विधायक अजय चंद्राकर ने इस मुद्दे को एक अत्यंत गंभीर और मानवीय मामला बताया। उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पूर्व में उनके द्वारा पूछे गए स्मार्ट सिटी और अन्य प्रश्नों के बाद सड़क सुरक्षा हेतु एक अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया था, लेकिन अभी भी गृह, परिवहन और स्थानीय प्रशासन जैसे विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। चंद्राकर ने सभापति महोदय से आग्रह किया कि वे सरकार को स्पष्ट निर्देश दें ताकि ये तीनों विभाग मिलकर सड़क हादसों को रोकने के लिए कोई स्थाई और प्रभावी समाधान निकाल सकें। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री केदार कश्यप ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय पर पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है और जल्द ही प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पुलिसिया कार्रवाई: जांजगीर-चांपा में काटे गए हजारों चालान
सदन में मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय कार्रवाई का ब्यौरा भी पेश किया। उन्होंने बताया कि जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है और चालान की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है:
- 2023: 29,104 वाहनों पर हुई कार्रवाई।
- 2024: चालान का आंकड़ा 39,000 तक पहुँचा।
- 2025: 41,000 से ज्यादा उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना लगाया गया।मंत्री ने आश्वासन दिया कि भारी वाहनों को शहर से बाहर रखने के लिए बायपास सड़कों के निर्माण पर विचार किया जा रहा है और जनजागरूकता अभियान भी तेज किए जाएंगे।
इलाज की कमी: ट्रॉमा सेंटर और क्रिटिकल केयर यूनिट पर जोर
बहस के दौरान एक और अहम मुद्दा ‘गोल्डन ऑवर’ यानी हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे में इलाज न मिल पाने का उठा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सुझाव दिया कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं, वहां ट्रॉमा सेंटर और ‘क्रिटिकल केयर यूनिट’ की स्थापना अनिवार्य होनी चाहिए ताकि घायल अस्पताल पहुंचने से पहले दम न तोड़ें।
सरकार का संकल्प: तीन विभाग मिलकर निकालेंगे स्थाई समाधान
सदन की गंभीरता को देखते हुए मंत्री केदार कश्यप ने भरोसा दिलाया कि सरकार विपक्ष के सकारात्मक सुझावों पर अमल करेगी। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार और त्वरित चिकित्सा सुविधा प्रदान करना भी जरूरी है। सरकार जल्द ही एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार करेगी जिससे छत्तीसगढ़ की सड़कों पर होने वाली अकाल मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।



