
CG Legislative Assembly Budget Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का दसवां दिन आज काफी गहमागहमी भरा रहने वाला है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जिसमें विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए तीखे सवालों का पिटारा खोल रखा है। आज मुख्य रूप से कृषि, पशुधन विकास, धर्मस्व और वित्त विभाग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। वरिष्ठ मंत्रियों, जिनमें रामविचार नेताम, ओ.पी. चौधरी और राजेश अग्रवाल शामिल हैं, उन्हें आज सदन में विधायकों की जिज्ञासाओं और विपक्ष के कड़े प्रहारों का जवाब देना होगा।
मंत्रियों की घेराबंदी: पशुधन से लेकर पर्यावरण तक सवाल
आज के सत्र में मंत्रियों के लिए चुनौती कम नहीं है। कृषि और पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम को कृत्रिम गर्भाधान और डेयरी योजनाओं पर जवाब देना होगा। वहीं, वित्त और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी राज्य की वित्तीय स्थिति और विकास परियोजनाओं का लेखा-जोखा पेश करेंगे। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल के विभागों से संबंधित अनुदान मांगों और योजनाओं पर भी विधायक अपनी राय रखेंगे। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए जनहित के मुद्दों पर पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
कृत्रिम गर्भाधान और दुग्ध उत्पादन पर अजय चंद्राकर का वार
वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पशुधन विकास मंत्री से राज्य में गौवंशीय पशुओं की सटीक संख्या और उनकी प्रजनन क्षमता को लेकर सवाल दागे हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या छत्तीसगढ़ दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बन पाया है? चंद्राकर ने कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की कमी और चिराग परियोजना के समय से पूर्व बंद होने के कारणों पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा, उन्होंने इस परियोजना में खर्च की गई राशि और ‘लैप्स’ हुए फंड का भी पूरा ब्यौरा मांगा है।
अलसी की खेती और फेल हुए बीजों पर हंगामा
पूर्व मंत्री और विधायक उमेश पटेल ने अलसी की खेती को लेकर कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि सीजन 2024-25 में जिन किसानों को बीज दिए गए, उनमें से कितने किसानों की फसल बीज प्रमाणीकरण में फेल हो गई। पटेल ने आरोप लगाया है कि बीज निगम द्वारा दिए गए खराब बीजों की वजह से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि किसानों के इस नुकसान की भरपाई (compensation) कब तक की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
मछली पालन नीति और पट्टा आबंटन का मामला
विधायक धर्मजीत सिंह ने छत्तीसगढ़ की नई मछली पालन नीति, 2022 को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या 10 साल के पुराने पट्टाधारियों को उनके अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर पट्टा नवीनीकरण का मौका दिया जाएगा। सिंह ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या सहकारी समितियों और समूहों को पट्टा अवधि समाप्त होने से 6 महीने पहले पुनः आबंटन पर विचार किया जाएगा। यह मुद्दा सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मत्स्य पालकों की आजीविका से जुड़ा है।
गन्ने की खरीदी और मिलों में अनलोडिंग की अव्यवस्था
विधायक संगीता सिन्हा ने प्रदेश में गन्ने की खेती के रकबे और समर्थन मूल्य पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि पिछले 5 वर्षों में गन्ने का कितना उत्पादन हुआ और किसानों को कितनी प्रोत्साहन राशि दी गई। संगीता सिन्हा ने गन्ना मिलों में होने वाली अव्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को अपनी गाड़ियां अनलोड कराने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।
डेयरी अनुदान में बदलाव और नई योजना का भविष्य
विधायक रोहित साहू ने डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत मिलने वाले 50% अनुदान को लेकर सवाल पूछा। इसके जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि चालू वर्ष में अनुदान बंद नहीं किया गया है, बल्कि 90 लाख रुपये का वितरण किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘डेयरी समग्र विकास योजना’ के तहत 40 करोड़ रुपये का नया प्रावधान किया गया है, जिसका पायलट प्रोजेक्ट अभी 6 जिलों में चल रहा है।
धान बीज उत्पादक किसानों का भुगतान और मुआवजा
विधायक ओंकार साहू ने कावेरी सीड्स कंपनी लिमिटेड द्वारा कराए गए धान बीज उत्पादन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने रायपुर, बलौदाबाजार और धमतरी जैसे जिलों के उन किसानों की सूची मांगी है जिनका भुगतान अब तक बकाया है। साथ ही, उन्होंने फसल क्षति होने पर मिलने वाले 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे के लंबित होने पर भी सवाल किया है। विपक्ष का आरोप है कि बड़ी कंपनियां किसानों का शोषण कर रही हैं और शासन इस पर मौन है।



