
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर अब छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की रसोई तक पहुंच गया है। वैश्विक तनाव के चलते पेट्रोलियम कंपनियों के सर्वर और लॉजिस्टिक चैन पर ऐसा ब्रेक लगा है कि जिले की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। धमतरी के उपभोक्ता न तो मोबाइल ऐप से और न ही व्हाट्सएप से गैस बुक कर पा रहे हैं। पिछले चार दिनों से कमर्शियल (नीले) सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद है, वहीं घरेलू (लाल) सिलेंडर को पाने के लिए उपभोक्ताओं को घंटों कतार में लगकर जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
सर्वर क्रैश होने से बुकिंग पोर्टल ठप
धमतरी जिले में कुल 11 गैस एजेंसियां हैं, जिनसे करीब 2.31 लाख घरेलू उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। पिछले 48 घंटों में सर्वर क्रैश होने की वजह से एक भी ऑनलाइन बुकिंग कंफर्म नहीं हो पाई है। हालत यह है कि सर्वर डाउन होने से उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बुकिंग का कंफर्मेशन मैसेज नहीं आ रहा, जिसकी वजह से डिलीवरी बॉय सिलेंडर देने से मना कर रहे हैं। एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी तकनीकी खराबी के कारण लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
होटल कारोबार पर ‘ब्लू संकट’ की मार
कमर्शियल गैस सिलेंडर (19 किग्रा) की सप्लाई बंद होने से धमतरी के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। नीले सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण अब कई जगहों पर चोरी-छिपे घरेलू लाल सिलेंडर का उपयोग शुरू हो गया है, जो न केवल गैर-कानूनी है बल्कि घरेलू सप्लाई पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। होटल व्यवसायियों का कहना है कि यदि एक-दो दिन में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने पड़ सकते हैं।
उपभोक्ताओं की आपबीती और जमीनी हकीकत
हरफतराई रोड स्थित एक गैस एजेंसी पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे रामलाल साहू ने बताया, “मैं तीन दिनों से ऑनलाइन बुकिंग की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन ओटीपी ही नहीं आ रहा। अब यहां आकर लाइन में लगा हूं, लेकिन यहां भी सर्वर डाउन होने की बात कही जा रही है।” एजेंसी संचालकों का कहना है कि वे मैन्युअल तरीके से लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारी भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण यह बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
क्यों पैदा हुए ऐसे हालात?
जानकारों के मुताबिक, इस संकट के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला ग्लोबल सर्वर डाउन होना; पेट्रोलियम कंपनियों के डेटा सेंटर अंतरराष्ट्रीय केबल्स पर निर्भर हैं और युद्ध के चलते साइबर सुरक्षा को देखते हुए कई डिजिटल गेटवे प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। दूसरा सप्लाई चैन का टूटना; कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता के कारण रिफाइनरियों से बॉटलिंग प्लांट तक गैस पहुंचने की रफ्तार काफी धीमी कर दी गई है।
राशनिंग और महंगाई का मंडराता खतरा
गैस एजेंसी संचालक मोहन अग्रवाल ने बताया कि नीले सिलेंडर की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह रुकी हुई है, जिसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। हालांकि, लाल सिलेंडर की आपूर्ति धीरे-धीरे की जा रही है। जानकारों का चेतावनी दी है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह संकट केवल गैस तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल-डीजल की राशनिंग और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।



