
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी इस पर पानी फेर रही है। रायगढ़ जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां सरकारी खजाने से पैसा जारी होने के बावजूद 128 में से 82 घरों का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर लैलूंगा जनपद के दो पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस सख्ती से पूरे जिले के पंचायत अमले में हड़कंप मच गया है।
कागजों में दौड़ा पैसा, जमीन पर सन्नाटा
रायगढ़ के लैलूंगा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बैस्कीमुड़ा और चिराईखार में पीएम आवास को लेकर भारी अनियमितता पाई गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, बैस्कीमुड़ा में 131 आवासों की मंजूरी दी गई थी। इनमें से 128 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त की राशि भी पहुंच गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक केवल 2 मकान ही पूरे हो पाए हैं। वहीं, 82 घरों का काम तो अभी तक शुरू भी नहीं किया गया है।
चिराईखार पंचायत का और भी बुरा हाल
लापरवाही का आलम केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत चिराईखार की स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। यहाँ 113 आवासों की स्वीकृति मिली थी और 107 हितग्राहियों को पहली किश्त का भुगतान कर दिया गया। बावजूद इसके, आज तक एक भी मकान पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। रिकॉर्ड बताते हैं कि 87 मकानों का निर्माण कार्य अभी तक भगवान भरोसे है और इनकी नींव तक नहीं खोदी गई है।
अफसरों से बदसलूकी पड़ी भारी
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित पंचायत सचिवों ने न केवल काम में लापरवाही बरती, बल्कि निरीक्षण के लिए पहुंचे उच्चाधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता के कारण ग्राम पंचायत चिराईखार के सचिव श्याम लाल सिदार और बैस्कीमुड़ा के सचिव अशोक कुमार पटेल को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं दिखाई दी।
3 दिन के भीतर मांगा गया जवाब
जिला प्रशासन ने इस मामले को पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के उल्लंघन के तौर पर लिया है। जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में दोनों सचिवों को 3 दिनों के भीतर लिखित और सप्रमाण स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलता है, तो इसे एकपक्षीय मामला मानकर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए सचिव खुद जिम्मेदार होंगे।
हितग्राहियों की बढ़ी मुश्किलें
योजना के तहत पहली किश्त मिलने के बाद भी काम शुरू न होने से ग्रामीण हितग्राही भी परेशान हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि तकनीकी मार्गदर्शन और सचिवों के असहयोग के कारण वे काम आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का लक्ष्य है कि बेघरों को जल्द से जल्द पक्की छत मिले, लेकिन भ्रष्टाचार और सुस्ती के कारण गरीब परिवारों का अपने घर का सपना अधूरा लटका हुआ है।
साय सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पहले ही साफ कर दिया है कि पीएम आवास योजना में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रायगढ़ में हुई यह कार्रवाई इसी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में जिले की अन्य पंचायतों की भी सघन जांच हो सकती है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि जिन हितग्राहियों के खातों में पैसे पहुंच चुके हैं, उनके घरों का निर्माण तत्काल युद्ध स्तर पर शुरू कराया जाए।
लापरवाह कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी
इस घटना ने जिले के अन्य पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों के लिए एक नजीर पेश की है। जिला पंचायत कार्यालय का कहना है कि सरकारी राशि का उपयोग समय पर न करना और हितग्राहियों को गुमराह करना गंभीर अपराध है। अब देखना होगा कि नोटिस के बाद इन पंचायतों में निर्माण कार्य कितनी तेजी से शुरू होता है और दोषी कर्मचारियों पर आगे क्या विभागीय गाज गिरती है।



