
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान की कस्टम मिलिंग और मिलर्स के बकाया भुगतान का मुद्दा गरमा गया है। भाजपा के कद्दावर विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार को घेरते हुए खरीफ वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 तक के आंकड़ों पर जवाब मांगा। उन्होंने सीधा सवाल किया कि इन तीन वर्षों के दौरान कस्टम मिलिंग, धान परिवहन और बारदाना उपयोगिता शुल्क को लेकर सरकार ने क्या नियम तय किए थे? चंद्राकर ने सदन में पूछा कि कितने मिलर्स को समय सीमा के भीतर भुगतान मिला और कितनों की राशि अब भी लंबित है। भुगतान में हो रही देरी का मुख्य कारण क्या है और सरकार यह बकाया कब तक चुकता करेगी, इसे लेकर उन्होंने वर्षवार ब्योरा तलब किया।
अमानक बारदाने का खेल: कम वजन के बोरों से किसानों को नुकसान का आरोप
सदन में सिर्फ भुगतान ही नहीं, बल्कि अमानक बारदाने की गुणवत्ता पर भी जमकर बहस हुई। विधायक पुरंदर मिश्रा ने जांजगीर-चांपा और कोरबा समेत कई जिलों का हवाला देते हुए कहा कि वहां आपूर्ति किए गए बारदानों का वजन निर्धारित मानक से 45 से 50 ग्राम तक कम पाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटिया स्तर के इन बारदानों की वजह से सीधे तौर पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मिश्रा ने सरकार से पूछा कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों और एजेंसियों पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
मंत्री के जवाब पर बिफरा विपक्ष: जूट कमिश्नर को क्लेम भेजकर पल्ला झाड़ने की कोशिश?
खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने जवाब देते हुए स्वीकार किया कि राज्य में करीब 4219 गठान बारदाने अमानक पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने इस संबंध में जूट कमिश्नर कार्यालय को क्लेम भेज दिया है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब से अजय चंद्राकर और अन्य सदस्य संतुष्ट नजर नहीं आए। चंद्राकर ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्लेम भेजने से किसानों की भरपाई कैसे होगी और अमानक बोरों के कितने प्रकरणों का अब तक निपटारा हुआ है? मंत्री ने दावा किया कि क्लेम का निराकरण प्रक्रियाधीन है, लेकिन विपक्ष ने इसे सरकारी खानापूर्ति करार दिया।
ब्लैकलिस्टेड मिलर्स की कुंडली: नेता प्रतिपक्ष ने मांगी पूरी लिस्ट
हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने सरकार से पूछा कि नियम विरुद्ध काम करने वाले किन-किन राइस मिलों को अब तक ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया गया है। महंत ने उन मिलर्स के खिलाफ दर्ज विभागीय प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी। इस पर मंत्री दयाल दास ने सदन को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही ब्लैकलिस्टेड मिलों और उन पर की गई कार्रवाई की पूरी सूची सदन के पटल पर रख देंगे।
पंजीकृत मिलर्स और विभागीय जांच: पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
विधानसभा में यह भी चर्चा हुई कि प्रदेश में वर्तमान में कितने राइस मिल पंजीकृत हैं और उनमें से कितनों के खिलाफ अनियमितता के मामले दर्ज हैं। अजय चंद्राकर ने जोर देकर कहा कि समय रहते विभागीय प्रकरणों का निराकरण न होना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। सरकार की ओर से बताया गया कि वर्षवार पंजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी है, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि मिलिंग और बारदाना वितरण की पूरी व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है, ताकि भविष्य में राजस्व और किसान दोनों का नुकसान न हो।
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