
छत्तीसगढ़ की सियासत में आज का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहने वाला है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आज विधानसभा का घेराव किया जाएगा। पार्टी ने इस प्रदर्शन को ‘मनरेगा बचाओ’ और स्थानीय जनहित के मुद्दों से जोड़ते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस आंदोलन की खास बात यह है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय दिग्गज नेता सचिन पायलट खुद जमीन पर उतरकर कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। बजट सत्र के बीच विपक्षी दल का यह कदम सरकार पर दोतरफा दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
पायलट का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम: दिल्ली से रायपुर तक का शेड्यूल
कांग्रेस के स्टार प्रचारक और कद्दावर नेता सचिन पायलट आज सुबह 10:15 बजे दिल्ली से नियमित विमान के जरिए रवाना होंगे और दोपहर करीब 12:30 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत के बाद वे सीधे भारत माता चौक के लिए प्रस्थान करेंगे। यहाँ प्रदेश भर से आए हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ पहले से ही तैनात रहेगी। पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस का यह विशाल जत्था विधानसभा की ओर कूच करेगा, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
राजीव भवन में मंथन: घेराव के बाद बनेगी चुनावी रणनीति
विधानसभा घेराव और जनसभा को संबोधित करने के बाद सचिन पायलट का मिशन खत्म नहीं होगा। दोपहर 3:00 बजे वे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय ‘राजीव भवन’ पहुंचेंगे, जहां प्रदेश के दिग्गज नेताओं और पदाधिकारियों के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग होगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना और सदन के भीतर सरकार को किन तकनीकी मुद्दों पर घेरना है, इसकी पटकथा लिखना होगा।
सदन में गर्माएगा माहौल: धर्मांतरण कानून पर टकराव के आसार
एक तरफ सड़क पर पायलट का प्रदर्शन चलेगा, तो दूसरी तरफ विधानसभा के भीतर भी पारा सातवें आसमान पर रहने की उम्मीद है। बजट सत्र के दौरान आज सदन में धर्मांतरण रोकने संबंधी नया कानून पेश होने की संभावना है। विपक्ष पहले ही इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कांग्रेस विधायकों ने रणनीति बनाई है कि वे अफीम की अवैध खेती, धान भंडारण की गड़बड़ी और धर्मांतरण कानून जैसे विषयों पर सरकार को सदन के पटल पर जवाब देने के लिए मजबूर करेंगे।
दोहरा दबाव: ‘सदन से सड़क तक’ सरकार की घेराबंदी
कांग्रेस की यह रणनीति साफ तौर पर सरकार को बैकफुट पर धकेलने की है। 23 मार्च तक चलने वाले इस बजट सत्र में कांग्रेस ने न केवल विधायी प्रक्रिया के जरिए बल्कि जनता के बीच जाकर भी अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सचिन पायलट जैसे राष्ट्रीय चेहरे को सामने रखकर कांग्रेस ग्रामीण वोट बैंक, खासकर मनरेगा मजदूरों के बीच यह संदेश देना चाहती है कि वह उनके हक की लड़ाई लड़ रही है।
चुनौतीपूर्ण दिन: सरकार के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें?
आगामी कुछ दिन साय सरकार के लिए अग्निपरीक्षा जैसे हो सकते हैं। एक ओर विपक्षी विधायकों के तीखे सवाल और दूसरी ओर सड़कों पर कार्यकर्ताओं का हुजूम प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना देगा। यदि आज का घेराव सफल रहता है, तो सत्र के शेष दिनों में विपक्ष का मनोबल और बढ़ेगा, जिससे विधायी कार्यों के दौरान तीखी बहस और हंगामे की तस्वीरें बार-बार देखने को मिल सकती हैं।



